वॉशिंगटन, 25 सितम्बर (आईएएनएस)। अमेरिका में भारतीय मूल के इंजीनियर के एक प्रोफेसर स्कोलियोसिस (रीढ़ की हड्डी का एक विकार) से पीड़ित बच्चों के लिए अपेक्षाकृत अधिक आरामदायक ब्रेसिज विकसित कर रहे हैं।
रोगियों के जीवन स्तर पर स्कोलियोसिज काफी प्रभाव डालता है। इसके कारण रोगियों की सक्रियता सीमित हो जाती है। उन्हें दर्द झेलना पड़ता है और उनके आत्मविश्ववास में कमी आ जाती है।
अग्रवाल के मुताबिक, “हर साल 30,000 बच्चे स्कोलियोसिज के उपचार के लिए कठोर ब्रेसिज का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 38,000 रोगी इसके लिए रीढ़ की सर्जरी कराते हैं। नए ब्रेसिज से इसके रोगियों को काफी लाभ मिलेगा।”
कोलम्बिया युनिवर्सिटी के वक्तव्य के मुताबिक, मेकेनिकल इंजीनियरिंग और रिहेबिलिटेशन एंड रिजनरेटिव मेडिसिन के प्राध्यापक सुनील अग्रवाल कोलम्बिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के पेडिएट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी के प्राध्यापक डेविड पी. रोए और बकनेल युनिवर्सिटी के मेकेनिकल इंजीनियरिंग के प्राध्यापक चार्ल्स किम के साथ मिलकर ऐसे ब्रेसिज विकसित कर रहे हैं।
अब तक इस्तेमाल किए जाने वाले ब्रेसिज में कई कमियां हैं। ये बच्चों के शरीर के ऊपरी हिस्से को इस कदर जकड़ देते हैं कि इनका इस्तेमाल करने वालों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
स्कोलियोसिज से पीड़ित बच्चों के विकास के साथ उसकी असामान्य मुद्रा को सुधारने के लिए जरूरी बाहरी शक्ति में बदलाव लाना आवश्यक होता है।
अग्रवाल ने कहा, “अगर हम ऐसे ब्रेसिज विकसित करने में कामयाब हो जाते हैं, जो रीढ़ की हड्डी को सुधारने के लिए जरूरी बाहरी शक्ति में जरूरत के मुताबिक बदलाव ला सके और साथ ही रोजमर्रा की गतिविधियों में कोई समस्या न पैदा करे तो हम रोगियों के लिए इस दिशा में काफी सकारात्मक बदलाव ला पाएंगे।”
अग्रवाल और उनकी टीम ऐसे ब्रेसिज का नमूना तैयार कर चुकी है।
रोबोटिक्स और पेडिएट्रिक ऑर्थोपेडिक के विशेषज्ञों की टीम कोलम्बिया युनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में स्कोलियोसिस से पीड़ित बच्चों पर इसका प्रयोग करने की योजना बना रही है।
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि नए ब्रेसिज अधिक आरामदायक होंगे और इससे पीड़ित बच्चों के जीवनस्तर सुधारने में काफी मदद मिलेगी।
dharmpath.com dharmpath