\US Allies Strait of Hormuz:अमेरिका USS Boxer समेत तीन युद्धपोत ईरान की ओर भेज रहा है, जिसमें हजारों मरीन सवार हैं. यानी ईरान के साथ जंग लंबी चलने वाली है और अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सबसे ज्यादा फोकस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने पर है. हालांकि यूरोप के कई देशों ने होर्मुज पर अमेरिका का साथ देने से इनकार किया लेकिन कुछ देश अमेरिका के साथ आ चुके हैं. आइये जानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कौन से देश अमेरिका के साथ हैं और इसे जल्द खोलना क्यों जरूरी है.डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत, दक्षिण कोरिया, जापान और ताइवान जैसे देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आने वाली सप्लाई पर काफी तक निर्भर हैं. यहां से ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन से आने वाला दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है.
डेनमार्क, अर्जेंटीना, सऊदी अरब और रोमानिया अमेरिका के साथ होर्मुज मिशन पर साथ हैं. ब्रिटेन और फिनलैंड भी कम से कम होर्मुज के लिए तो अमेरिका की मदद कर ही सकते हैं.
रूस, चीन और पाकिस्तान को अब तक इस युद्ध में ईरान के पक्ष में माना जा रहा है. हालांकि पाकिस्तान अमेरिका का भी पिछलग्गू देश है.
फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान इस मिशन में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर चुके हैं. उनका कहना है कि ईरान युद्ध शुरू होने से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई. वहीं इन देशों का यह भी कहना है कि अगर अमेरिका युद्ध विराम करता है तो वे होर्मुज खोलने में मदद कर सकते हैं. हालांकि ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे ईरान युद्ध जीतने जा रहे हैं. अब युद्ध विराम की कोई संभावना नहीं है.
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