जर्काता/नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। इंडोनेशिया ने शुक्रवार को मादक पदार्थो की तस्करी के मामले में चार दोषियों को मौत की सजा दी। इनमें भारतीय मूल के दोषी गुरदीप सिंह शामिल नहीं है। इस मामले में 13 लोगों को दोषी पाया गया था, जिनमें गुरदीप भी शामिल हैं।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया के अटार्नी जनरल मुहम्मद रुम ने नुसकमबंगन जेल के बाहर संवाददाताओं को बताया कि फिलहाल प्रशासन ने यह तय नहीं किया है कि अन्य 10 आरोपियों को कब गोली मारकर मौत की सजा दी जाएगी।
नाइजीरिया के दो और सेनेगल व इंडोनेशियाई के एक-एक दोषी को मौत की सजा दे दी गई है। इससे पहले इनके मामलों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई थी।
नाइजीरियाई मूल के एक दोषी की कानूनी टीम ने अपने मुवक्किल का बचाव करते हुए कहा कि दो नाइजीरियाइयों में से एक हफ्री जेफरसन एजीक को दी गई मौत की सजा गलत है।
रेनोव तमरंग ने मोबाइल से भेजे एक संदेश में कहा, “इस स्तर पर हम केवल इतना ही कह सकते हैं कि हम इस खबर से बहुत निराश हैं कि जेफ को मौत की सजा दे दी गई है। सरकार ने जेफ के मामले में जारी कानूनी प्रक्रिया का सम्मान नहीं किया”
उन्होंने कहा, “हमारे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि जेफ को यातना दी गई और उसके मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई। हमारे मुवक्किल के लिए अदालत के फैसले में नस्लवाद साफ देखा जा सकता है।”
वहीं, भारत इस मामले पर गुरदीप सिंह को क्षमादान दिलाने के लिए इंडोनेशिया के नेतृत्व के साथ संपर्क में है।
जकार्ता में भारतीय दूतावास के अधिकारी यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि गुरदीप को मौत की सजा मिलने से पहले सभी कानूनी तरीकों का सहारा लिया जाए।
नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने गुरुवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, “गुरदीप सिंह के कानूनी प्रतिनिधि अफदाल मुहम्मद का मानना है कि वह इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के समक्ष प्रासंगिक कानून के तहत क्षमादान याचिका दायर कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “भारतीय दूतावास ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय को एक पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि मृत्युदंड देने से पहले सभी कानूनी उपायों को अपना लिया जाए।”
जकार्ता में गुरदीप को 29 अगस्त, 2004 को सोइकार्नो हट्टा हवाईअड्डे से 300 ग्राम हेरोइन के साथ मादक पदार्थो की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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