देश में 15 जुलाई को हुए इस प्रयास को सेना के एक धड़े ने विफल कर दिया था। इस दौरान लगभग 300 लोगों की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद अमेरिका में रह रहे तुर्की के धर्म प्रचारक फतुल्लाह गुलेन के हजारों समर्थकों को सरकारी नौकरियों से बर्खास्त कर दिया गया या उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
तुर्की के सरकार ने तख्तापलट के प्रयास के लिए गुलेन को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि उन्होंने पूरे मामले में किसी भी संलिप्ता से इनकार किया।
बीबीसी के मुताबिक तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने रैली में कहा, “तुर्की की संसद मृत्युदंड पर विचार करेगी। मैं पहले ही इसकी घोषणा करता हूं कि मैं संसद के फैसले को मंजूरी दे दूंगा।”
तख्तापलट की कोशिश के बाद तुर्की सरकार के रवैये की पश्चिमी देशों ने आलोचना की है। तुर्की ने यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए आवेदन दिया था, जिसे नामंजूर कर दिया गया है।
एर्दोगान ने रैली में कहा, “आज यहां हमारी उपस्थिति हमारे दुश्मनों को परेशान कर रही है, जैसा कि 16 जुलाई को हुआ था। उस रात लोगों ने अपनी जान पर खेलकर तख्तापलट की साजिश को नाकाम किया। हमारे शहीदों का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा।”
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