328 सदस्यीय संसद ने गुरुवार को मसौदे को 234 सांसदों के समर्थन के साथ पारित कर दिया।
इस मसौदे को लेकर इराक में काफी लंबी चर्चा चली। कुछ लोगों का मानना है कि इस कानून के कारण आतंकवादी या अपराधी रिहा होंगे, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि कुछ सजायाफ्ता कैदी ऐसे भी हैं जिन्होंने उत्पीड़न के चलते अपराध कबूल किया था या उन्हें गलत खुफिया जानकारी के आधार पर खुफिया एजेंटों ने गिरफ्तार किया था।
नए कानून में राजनीतिक दलों ने न्यायिक समिति के गठन पर सहमति जताई है, जो यह फैसला करेगी कि जो कैदी यह सोचते हैं कि गलत सूचना या उत्पीड़न के कारण उन्हें जेल की सजा हुई है, उनके मुकदमे की फिर से सुनवाई होगी या नहीं।
देश में सुन्नी मुसलमान आम माफी कानून चाहते हैं। उनका आरोप है कि शियाओं के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें किनारे किया है। उनका दावा है कि सांप्रदायिक संघर्ष के कारण शिया बहुल सुरक्षा बल अंधाधुंध तरीके से उन्हें गिरफ्तार कर रहे हैं और उनका उत्पीड़न कर रहे हैं।
आम माफी का कानून उन मुद्दों में शामिल था जिनके आधार पर 2014 में संसदीय राजनीतिक दलों में सहमति बनी थी और प्रधानमंत्री हैदर अल-आब्दी के नेतृत्व में सरकार अस्तित्व में आई थी।
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