नासा शनि के उपग्रह ‘टाइटन’ पर पनडुब्बी भेजेगा

वाशिंगटन, 27 अगस्त (आईएएनएस)। शनि का उपग्रह टाइटन बाहरी सौर प्रणाली में इस मामले में विचित्र है कि धरती के बाहर यह एक मात्र ऐसा उपग्रह है जिसकी सतह पर तरल झीलें और समुद्र हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने खुलासा किया कि उसकी योजना टाइटन के सबसे बड़े समुद्र क्रेकेन मारे की गहराई में एक पनडुब्बी भेजने की है।

इनवर्स डॉट कॉम ने शनिवार को खबर दी है कि नासा क्रेकेन मारे की गहराई में एक पनडुब्बी भेजने पर काम कर रहा है।

हालांकि, टाइटन के जो समुद्र हैं वे धरती के समुद्रों की तरह पानी से नहीं, बल्कि हाइड्रोकार्बन से बने हैं। नासा क्यों टाइटन पर जाना चाहता है। इसके कारणों में से पहला तो यह सुनिश्चित करना है कि क्या टाइटन पर हाइड्रोकार्बन पर आधारित जीवन संभव है?

यह बात नासा के क्रायोजेनिक्स इंजीनियर जासन हार्टविग ने इस हफ्ते उत्तरी कारोलिना के रालेइघ में आयोजित नासा के इनोवेटिव एडवांस्ड कंसेप्ट्स सिम्पोजियम में कही।

दूसरा कारण है कि अत्यधिक ठंड और तरल मीथेन के समुद्रों को छोड़कर क्या बादलों और वातावरण के मामले में टाइटन क्या पृथ्वी से बहुत मिलता-जुलता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मीथेन के समुद्र में इसके सुराग छुपे हो सकते हैं कि जीवन और संभवत: कुछ विचित्र परग्रही सूक्ष्म जीव किस तरह विकसित हो सकते हैं।

मीथेन के समुद्र में गोता लगाने वाली पनडुब्बी में समुद्र की रासायनिक संरचना, प्रवाह, ज्वार और समुद्र तल की बनावट को जांचने-परखने के लिए उपकरण भी लगे रहेंगे।

नासा ने इसे भेजने की लिए वर्ष 2038 को चुना है।

नासा ने एक इससे पहले एक बयान में कहा कि करीब 300 मीटर गहरा और करीब एक हजार किलोमीटर में फैला क्रेकेन मारे ग्रहों की एक अभूतपूर्व जांच-पड़तात अभियान के अवसर का प्रतिनिधित्व करता है।

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