काबुल, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोहम्मद हनीफ अतमर ने सोमवार को कहा कि इस बात की कोई आशा नहीं है कि इस्लामाबाद तालिबान के साथ शांति वार्ता में काबुल की मदद करेगा।
काबुल, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोहम्मद हनीफ अतमर ने सोमवार को कहा कि इस बात की कोई आशा नहीं है कि इस्लामाबाद तालिबान के साथ शांति वार्ता में काबुल की मदद करेगा।
गांधारा/आरएफईआरएल के साथ एक साक्षात्कार में अतमर ने कहा, “हमें पाकिस्तान से संदेश प्राप्त हुए हैं, क्योंकि हमारे कूटनीतिक संबंध हैं। हमारे राष्ट्रपति ने उनसे कहा है कि हमें कोई आशा नहीं है कि वे शांति वार्ता में हमारी मदद करेंगे।”
उन्होंने कहा, “अफगान राष्ट्रपति ने पाकिस्तान से कहा कि उन्होंने वादा किया था कि वे शांति वार्ता न चाहने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने हमसे झूठ बोला।”
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की ईमानदारी पर सवाल खड़े करते हुए अतमर ने कहा, “इस्लामाबाद ने कहा कि तालिबान नेता पाकिस्तान में नहीं है, लेकिन उसके बाद हमने देखा कि मुल्ला मंसूर जब पाकिस्तान के अंदर यात्रा के दौरान मारा गया तो उसके पास एक पाकिस्तानी पहचान पत्र था।”
अतमर ने कहा, “हमने उनसे स्पष्ट तौर पर कहा कि आप ने झूठ क्यों बोला? यह (शांति प्रक्रिया) आप के हित में नहीं होगी। आतंकवाद आपको ही खत्म करेगा, और इसने ऐसा किया है। मैं आशा करता हूं कि पाकिस्तान तार्किक रूप से सोचेगा और इस मुद्दे पर ध्यान देगा।”
अफगानिस्तान सरकार चार पक्षीय समन्वय समूह के काम शुरू करने के तत्काल बाद तालिबान के साथ सीधी शांति वार्ता की उम्मीद कर रहा था। इन चार पक्षों में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अमेरिका और चीन शामिल हैं।
चार पक्षीय समन्वय समूह की कई दौर की वार्ता आयोजित हुई और इसके सदस्यों ने हिंसा का रास्ता अख्तियार करने वाले समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने पर सहमति जताई थी, लेकिन तालिबान ने इस समूह के आह्वान को और अफगान सरकार के साथ सीधी बातचीत में शामिल होने के आग्रह को खारिज कर दिया।
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