नई दिल्ली, 29 सितम्बर (आईएएनएस)। हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के तीसरे संस्करण में दिल्ली डायनामोज की कोशिश पुरानी असफलताओं को भूलकर खिताब अपने नाम करने की होगी।
2014 में आयोजित लीग के पहले संस्करण में डायनामोज प्रभावशाली नहीं रहे थे, लेकिन 2015 में यह टीम अपने मुख्य कोच और मर्की खिलाड़ी रोबटरे कार्लोस की बदौलत फाइनल के करीब तक गई थी।
डायनामोज ने सेमीफाइनल के पहले चरण में एफसी गोवा को हराकर फाइनल की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया था, लेकिन अंतिम लड़ाई में कार्लोस को अपने ही देश के एक अन्य दिग्गज जीको के हाथों हार मिली। एफसी गोवा ने फाइनल में जगह बनाई और दिल्ली को बाहर होना पड़ा।
डायनामोज का फाइनल में पहुंचना उत्तर क्षेत्र में इस सुंदर खेल के प्रचार और विकास में ठीक उसी तरह मददगार होगा, जिस तरह बीते साल चेन्नइयन एफसी की खिताबी जीत के कारण चेन्नई में फुटबाल प्रशंसकों की संख्या में इजाफा देखा गया। फुटबाल चेन्नई की संस्कृति का हिस्सा नहीं लेकिन चेन्नइयन एफसी की सफलता ने वहां के लोगों को इसे देखने और समझने के लिए प्रेरित किया है।
इस संस्करण में डायनामोज को कार्लोस का साथ नहीं मिलेगा क्योंकि क्लब के साथ उनका करार खत्म हो गया है। उनकी जगह गियानलुका जाम्ब्रोटा ने क्लब के मुख्य कोच का पद संभाला है।
जाम्ब्रोटा 2006 में विश्व कप खिताब जीतने वाली इटली की टीम के स्टार खिलाड़ी रहे थे। वह स्विट्जरलैंड की द्वितीय श्रेणी के क्लब एफसी चियासो के कोच रह चुके हैं।
जाम्ब्रोटा की पहली कोशिश अच्छी शुरुआत की होगी, जिसकी जरुरत हर टीम को होती है।
दिल्ली ने अपने शीर्ष खिलाड़ियों को बनाए रखा है जिससे उसकी टीम मजबूत हो गई है। गोलकीपर टोनी डोबलास बीते साल के स्टार थे और अब उन्हें नया करार दिया गया है। इसके बाद स्ट्राइकर रिचर्ड गाद्जे हैं, जो बीते साल कुछ खास नहीं कर सके थे लेकिन आईएसएल में उनका अनुभव दिल्ली के काफी काम आएगा।
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