धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश), 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुनिया की सबसे जटिल ट्रैक साइकिलिंग रैलियों में शुमार हीरो एमटीबी हिमालया रैली के 12वें संस्करण का आखिरी चरण न सिर्फ एलिवेशन और ट्रैक की वजह से सरल रहा, बल्कि विदेशी राइडरों ने ‘कमराडरी’ (खेल भावना) का परिचय देते हुए आखिरी स्टेज को भारतीय राइडरों के नाम करने का निर्णय किया।
धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश), 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुनिया की सबसे जटिल ट्रैक साइकिलिंग रैलियों में शुमार हीरो एमटीबी हिमालया रैली के 12वें संस्करण का आखिरी चरण न सिर्फ एलिवेशन और ट्रैक की वजह से सरल रहा, बल्कि विदेशी राइडरों ने ‘कमराडरी’ (खेल भावना) का परिचय देते हुए आखिरी स्टेज को भारतीय राइडरों के नाम करने का निर्णय किया।
इसी वजह से भारतीय स्टार ट्रैक साइकिलिस्ट देवेंद्र ठाकुर सोमवार को फिनिश लाइन पार करने वाले पहले राइडर रहे, जबकि भारत में ट्रैक साइकिलिंग का उदीयमान सितारा बनकर उभरे शिवेन सिर्फ दो मिनट के अंतर से दूसरे स्थान पर रहे।
लगातार छह चरण जीतकर ओपन मेन सोलो कैटेगरी का खिताब पहले ही सुनिश्चत कर चुके जर्मनी के एंडी शिवाल्ड और 2014 के चैम्पियन कोरी वालास तथा अमेरिका से यहां पहली बार रैली में हिस्सा लेने आए थॉमस टर्नर के बीच भले इससे पहले कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली हो, लेकिन सोमवार को आखिरी चरण की रेस उन्होंने कंधे से कंधा मिलाए साथ-साथ पूरी की।
ओपन वुमन सोलो कैटेगरी में भी अब तक अविजित रहीं इंग्लैंड की कैथरीन विलियमसन और पुर्तगाल की इल्डा परेरा ने एकदूसरे का हाथ पकड़े साथ-साथ फिनिश लाइन पार की।
खेल भावना का एक और नजारा टीम ऑफ टू कैटेगरी में देखने को मिला। रेस के पांचवें चरण में क्रिस्टाइन और आर्मिन की जोड़ी क्रिस्टाइन के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से टूट गई थी। क्रिस्टाइन इस समय चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में अपनी टूटी गर्दन का उपचार करवा रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपनी जोड़ीदार आर्मिन से रेस पूरी करने के लिए कहा।
क्रिस्टाइन की इच्छा का सम्मान करते हुए आर्मिन ने अब तक राइडरों के दल के साथ तकनीकी सहयोगी के रूप में सफर कर रहे मार्को के साथ आखिरी चरण की रेस में हिस्सा लेने का फैसला किया और दोनों ने साथ-साथ फिनिश लाइन पार कर निश्चित तौर पर पूरे हिमाचल का दिल जीत लिया।
आखिरी चरण की रेस पूरी करने के बाद आर्मिन ने आईएएनएस से कहा, “क्रिस्टाइन चाहते थे कि मैं इस रैली को पूरा करूं और उन्हीं की इच्छा का सम्मान करते हुए मैंने मार्को के साथ आखिरी चरण की रेस में हिस्सा लेने का फैसला किया।”
आर्मिन ने कहा, “मैंने अब तक पूरी दुनिया में जितनी रैलियों में हिस्सा लिया उनमें यह सबसे कठिन रेस है और उतना ही रोमांचक भी।”
आईएएनएस ने जब आर्मिन से पूछा कि क्या वह यहां दोबारा लौटकर आना चाहेंगी तो आर्मिन का जवाब था, “निश्चित तौर पर मैं यहां दोबारा आना पसंद करूंगी। इस रेस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ एक प्रतियोगिता भर नहीं है, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों से रूबरू होने का अवसर भी देती है। मैं अपने देश के और भी राइडरों को यहां आने के लिए प्रेरित करूंगी।”
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