भारत, रूस का विशिष्ट रणनीतिक साझेदार : पुतिन (राउंडअप)

मॉस्को, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि रूस अपने ‘विशिष्ट रणनीतिक साझेदार’ भारत को अति उन्नत हथियारों व रक्षा प्रौद्योगिकी का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है और अन्य ब्रिक्स राष्ट्र आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में नई दिल्ली का साथ देने को कटिबद्ध हैं।

पुतिन ने आईएएनएस तथा स्पूतनिक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा, “भारत को अति उन्नत हथियार तथा सैन्य उपकरणों की सीधी आपूर्ति, संयुक्त अनुसंधान तथा सैन्य उद्देश्यों के लिए उपकरणों का निर्माण करने में रूस सबसे शीर्ष पर रहा है। हमारे देशों ने सैन्य प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सक्रिय रूप से सहयोग किया है।”

राष्ट्रपति ने कहा, “ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का निर्माण और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का विकास सफल संयुक्त परियोजनाएं हैं।”

पुतिन इस सप्ताहांत गोवा में होने वाले पांच देशों के ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में कई रूसी परियोजनाओं का न सिर्फ व्यावसायिक महत्व है, बल्कि ये दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक व आर्थिक भूमिका अदा करती हैं।

पुतिन ने आईएएनएस और रूस की समाचार एजेंसी स्पूतनिक द्वारा संयुक्त रूप से ईमेल के जरिये भेजे गए सवालों के जवाब में कहा, “रूसी कंपनियों को भारतीय बाजार में वास्तविक संभावनाएं दिखती हैं।”

उन्होंने भारत को रूस का विशिष्ट सामरिक साझेदार करार देते हुए कहा, “दोनों देशों के बीच सहयोग सभी क्षेत्रों में सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह मित्रता, विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित है।”

पुतिन ने कहा, “भारत, रूस का प्रमुख विदेशी व्यापारिक साझेदार देश बना हुआ है। हालांकि, 2015 में दोनों देशों के बीच व्यापार 7.8 फीसदी घटा, लेकिन हम इस नकारात्मक रूझान से उबरने को लेकर प्रतिबद्ध है। हमारे ख्याल से यह वैश्विक बाजारों और विनिमय दरों में अस्थिरता से जुड़ा हुआ है।”

पुतिन की यह टिप्पणी उस अवधारणा पर आई है, जिसके अनुरूप भारत ने हथियारों की खरीद को लेकर अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों के साथ संबंध मजबूत करते हुए अपने सैन्य कूटनीतिक संबंधों में रणनीतिक बदलाव किया है।

रूस पारंपरिक रूप से भारत को सबसे अधिक हथियारों की आपूर्ति कराने वाला देश रहा है, लेकिन विमान वाहक पोत गोर्शकोव सहित कुछ रूसी परियोजनाओं की लागत अधिक होने की वजह से दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा हुआ।

भारत ने रूस द्वारा पाकिस्तान को एमआई-35 हेलीकॉप्टर और चीन तथा पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित हल्के लड़ाकू विमान जेएफ-17 के इंजन की आपूर्ति के फैसले पर भी चिंता जताई है।

रूस ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ संयुक्त सैन्याभ्यास भी किया, वह भी ऐसे समय में जबकि भारत आतंकवाद को बढ़ावा देने को लेकर पाकिस्तान को अलग-थलग करने के प्रयास में जुटा हुआ था। भारत ने इस संयुक्त सैन्याभ्यास का विरोध किया था।

पुतिन ने आतकंवाद पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ब्रिक्स संघ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।

पुतिन ने कहा, “गोवा में पांचों ब्रिक्स देशों के पास इस अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का सुनहरा अवसर होगा। हम आतंकवाद, नशीले पदार्थो की तस्करी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं और ये देश आपसी संघर्षो को सुलझाने तथा अंतर्राष्ट्रीय सूचना सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान देंगे।

गोवा में दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन शनिवार से शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम से इतर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर सकते हैं।

मोदी, पुतिन के साथ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा भी उठा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान की मदद करने के उद्देश्य से रूस व भारत अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत राष्ट्रीय सुलह के प्रयास का समर्थन करने की जरूरत को साझा करते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा, मादक पदार्थ रोधी क्षमता का निर्माण, सामाजिक व आर्थिक विकास सुनिश्चित करने तथा आंतरिक संपर्क बढ़ाने में दोनों देश रचनात्मक बहुपक्षीय सहयोग को गहरा करने में रुचि रखते हैं।”

पुतिन को ये प्रश्न पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में भारत द्वारा 28 सितंबर की रात किए गए ‘सर्जिकल स्ट्राइक्स’ से पहले ईमेल किए गए थे।

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