लंदन, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। अपने लिए झूठ बोलना धीरे-धीरे आपको एक बड़ा झूठा बना सकता है और अंतत: आपको उस स्थिति में ला देगा, जहां आपका दिमाग बेईमानी में लगने लगेगा। आपको छल करना आसान लगने लगेगा, एक अध्ययन में यह बात सामने आई है।
निष्कर्ष बताता है कि छोटे झूठ बोलना हमारे दिमाग को नकारात्मक भावनाओं से जोड़ देता है और हमें भविष्य में बड़े झूठ बोलने को प्रोत्साहित करता है।
इसके अलावा, प्रमस्तिष्क खंड-मस्तिष्क का एक भाव जो भावना के साथ जुड़ा होता है-जब लोग अपने फायदे के लिए पहली बार झूठ बोलते हैं तो ज्यादा सक्रिय हो जाता है।
प्रमस्तिष्क का हर बार झूठ बोलने की प्रक्रिया के साथ प्रतिक्रिया धीमी होती जाती है, जबकि झूठ का परिणाम बढ़ता जाता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रमस्तिष्क की सक्रियता में ज्यादा गिरावट आना भविष्य में बड़े झूठ बोलने की भविष्यवाणी करता है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के ताली शिरोत ने कहा, “जब हम निजी फायदे के लिए झूठ बोलते हैं, हमारा प्रमस्तिष्क एक नकारात्मक भावना उत्पन्न करता है। यह तय करता है कि हमें किस हद तक झूठ बोलना है।”
अध्ययन के लिए दल ने 80 वालंटियर को शामिल किया, जिन्होंने दल के आकलन के कार्य में भाग लिया। इसमें एक जार में पैसे की संख्या का अनुमान लगाना था और अपने अनुमान को अनदेखे भागीदारों को एक कंप्यूटर के जरिए भेजना था।
प्रतिभागियों को ज्यादा सही अनुमान लगाने को कहा गया, जिससे उन्हें और उनके साथी को फायदा होगा। ज्यादा राशि का आकलन वालंटियर और उसके भागीदार के खर्चे के लिए लाभकारी होगा।
परिणाम बताते हैं कि लोगों ने थोड़े अतिशयोक्ति के साथ अनुमान लगाना शुरू किया, जिससे उनके प्रमस्तिष्क से ज्यादा प्रतिक्रिया आने लगीं।
प्रयोग के साथ उनकी अतिशयोक्ति बढ़ती गई, जबकि उनके प्रमस्तिष्क की प्रतिक्रिया गिरती गई।
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