सरकार ने नोटबंदी पर चर्चा नहीं कराई, विपक्ष पहुंचा राष्ट्रपति भवन

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (आईएएनएस)। नोटबंदी जैसे बड़े फैसले का असर देश के हर इंसान और समूची अर्थव्यवस्था पर पड़ा, लेकिन केंद्र सरकार ने संसद में इस पर चर्चा की इजाजत नहीं दी। बिफरे विपक्ष ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन भी जब नोटबंदी पर चर्चा नहीं हो सकी, तब कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय और जनता दल (यू) के शरद यादव शामिल थे।

ज्ञापन में कहा गया, “सरकार के रवैये की वजह से नोटबंदी जैसे अहम मसले पर संसद के शीतकालीन सत्र में चर्चा करने की अनुमति नहीं दी गई। कहा गया, चर्चा करनी है तो दूसरे मुद्दों पर करें।”

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बाद में मीडिया से कहा, “हमने पूरा प्रयास किया नोटबंदी के मुद्दे पर चर्चा की जाए, लेकिन सरकार ने हमारे स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति नहीं दी। उलटे प्रचार करवाया कि विपक्ष ही चर्चा से भाग रहा है। संसद के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। इस सरकार की लोकतंत्र में कोई आस्था नहीं है, ये लोग संसद को भी तानाशाही तरीके से चलाना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “इस सरकार ने लोकतंत्र के हर सिद्धांत को तोड़ने का प्रयास किया। संसद को चलाने की पूरी जिम्मेदारी सरकार की है।”

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