एक साधक:जो सादगी से है साधना मे लीन

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एक कुटिया मे निवास है इनका
सड़क से उतर कर कुछ दूर पैदल चल कर जब हम पहुंचे तो इनसे मुलाकात हुई ,एक सादगी भरी और स्वच्छ मिट्टी की कुटिया मे इनका निवास है ,सुरम्य स्थान इन्होने अपने निवास की वजह से इसे बना लिया है.चूंकि इस यह स्थान ग्राम तूंमड़ी मे स्थित है अतः इन्हे इसी नाम से लोग पुकारते हैं,इस स्थान पर पहुँचते ही इस जगह की शांति का एहसास होता है .
13 वर्ष पहले ये पूना से आये थे 
जब हमने इनसे पूछा कि ये कहा से आये तो इन्होने पूना से आना बताया,अब ये ओंकारेश्वर जाना चाहते हैं,इन्होने कहा कि अब यहाँ रहने का समय पूरा होने वाला है अब ओंकारेश्वर जाऊँगा.
एक कोरकू वनवासी सेवा करता है 
यहाँ कि व्यवस्था मे कोरकू समाज का पर्वत सिंह रहता है जो सुबह शाम कि व्यवस्था यहाँ कि करता है ,यहाँ कि सॉफ -सफाई देख कर इसकी सेवादारी के दर्शन हो जाते हैं .पर्वत सिंह ने जब हमारे लिये बिना दूध कि चाय बनाई तब यह देखने मे आ गया कि बाहरी दुनिया से अछूता यह शख्स कितना निर्मल है लेकिन स्वाद मे यह चाय बेजोड़ थी मैने उसे यह चाय नीबू के साथ बनाना सिखाई लेकिन उसकी बनाई चाय का स्वाद हमेशा याद रहेगा.
ये सिर्फ एक ब्रांड कि सिगरेट भेंट मे लेते हैं 
ये किसी से कुछ नहीं लेते,खाने कि व्यवस्था ग्रामीण कर देते है,हाँ मात्र यदि ये लेते भी हैं तो गोल्ड फ्लेक ब्रांड कि सिगरेट इसे वे स्वीकार कर लेते हैं.
ये उस प्रकाश को अपना गुरु मानते हैं 
इनसे जब पूछा गया कि आपके गुरु कौन हैं तब इन्होने कहा वही जिन्हे कोई नहीं जानता ,जिनका कोई रूप रंग आकार नहीं वे ही मेरे गुरु हा,उन्ही शक्ति को मैं मानता हूँ,मेरे कोई दैहिक गुरु नहीं,इनके पास आने वाले लोगों को ये मंत्र देते हैं और कहते हैं खुद ही जपो मैं क्या कर सकता हूँ.
हम आजके इस भ्रमित वातावरण मे आपको भारतीय परंपरा के ऐसे साधकों से परिचित कराते रहेंगे ताकि आप भ्रमित होकर कहीं ऐसे हाथो मे ना फंस जाएं कि बाद मे पछताने के लिये भी कुछ ना हो .
इसीलिये कहा है ,पानी पियो छान के,गुरु बनाओ जान के 

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