ओबामा ने इजराइल विरोधी प्रस्ताव को मंजूरी दी (लीड-1)

अरुल लुइस

अरुल लुइस

संयुक्त राष्ट्र, 24 दिसंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके उत्तराधिकारी डोनाल्ड ट्रंप के बीच वैचारिक मतभेद की झलक एक बार फिर देखने को मिली, जब ओबामा ने इजराइल विरोधी प्रस्ताव पर वीटो नहीं होने दिया।

सुरक्षा परिषद ने इजराइल द्वारा फिलीस्तीनी इलाकों- वेस्ट बैंक और पूर्वी जेरूसलम में बस्तियां बसाने की निंदा की। जहां एक ओर ट्रंप इस प्रस्ताव पर वीटो के पक्ष में हैं, वहीं ओबामा इसके विरोध में हैं। दोनों के बीच की खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सबके सामने आ गई है।

साल 1967 में फिलीस्तीनी इलाकों में जोर्डन की कब्जाई गई जमीन पर इजराइल द्वारा निर्माण किए जाने और बस्तियां बसाने संबंधी प्रस्ताव को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना गया है। इस प्रस्ताव के पक्ष में सुरक्षा परिषद के 14 सदस्य देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

इस प्रस्ताव पर वीटो करने के बजाय अमेरिकी स्थायी प्रतिनिधि सामंथा पावर अनुपस्थित रहीं, जिससे यह प्रस्ताव आसानी से पारित हो गया।

ट्रंप ने प्रस्ताव पारित होने के बाद ट्वीट किया, “संयुक्त राष्ट्र में 20 जनवरी के बाद से चीजें बदल जाएंगी।” इस दिन वह शपथ लेंगे।

नए राष्ट्रपति ने यह भी ट्वीट किया कि संयुक्त राष्ट्र में इस प्रस्ताव पर वीटो होना चाहिए।

यह प्रस्ताव मिस्र द्वारा पेश किया गया था, लेकि न ट्रंप ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी पर इस प्रस्ताव को वापस लेने का दबाव डाला।

मिस्र ने प्रस्ताव के संबंध में गुरुवार को होने वाली बैठक से पल्ला झाड़ लिया और यह रद्द हो गया और इसके बाद एक नाटकीय घटनाक्रम में न्यूजीलैंड, सेनेगल, वेनेजुएला, मलेशिया ने इस प्रसताव को सुरक्षा परिषद में पेश किया जो आखिरकर पारित हो गया।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि वाशिंगटन ने इसे इसलिए पारित होने दिया, क्योंकि वह इजराइल-फिलीस्तीन के आपसी संघर्ष का समाधान होते देखना चाहता है।

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