यौन शोषण मामले में जस्टिस गांगुली का इस्तीफा

large121859नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस ए के गांगुली के पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। लॉ इंटर्न के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरे जस्टिस गांगुली ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। इससे पहले, 3 जनवरी को ही जस्टिस गांगुली ने एनयूजेएस (नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज) के गेस्ट फैकल्टी पद से इस्तीफा दिया था। खबर है कि जस्टिस गांगुली ने अपने इस्तीफे के संबंध में पूर्व अटॉनी जनरल से बात की थी, जिसके बाद यह फैसला किया। उनका इस्तीफा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के चंद घंटों में भी आया है, जिसमें गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के कोई भी प्रयास करने से केन्द्र सरकार को रोकने के लिये याचिका खारिज कर दी गई थी।

मालूम हो कि यौन उत्पीड़न मामले में जस्टिस गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की चौतरफा मांग हो रही है। भाजपा, तृणमूल कांग्रेस के अलावा एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह समेत कई महिला वकील भी उन्हें हटाने की मांग कर चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया जस्टिस गांगुली को दोषी माना है।

क्या है मामला

गौरतलब है कि एक लॉ इंटर्न ने जस्टिस गांगुली पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उसने अपने हलफनामे में कहा था कि दिसंबर 2012 में होटल के कमरे में जस्टिस गांगुली ने उसे शराब पिलाई। उसका हाथ चूमा और आई लव यू बोला। उन्होंने उससे रात में होटल में ही रुकने के लिए भी कहा था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन जजों की समिति का गठन कर मामले की जांच कराई थी। जांच के बाद इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि माहिला इंटर्न के प्रति जस्टिस गांगुली का व्यवहार अशोभनीय था। इसके बाद से ही जस्टिस गांगुली के इस्तीफे की मांग तेज हो गई थी।

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