‘अमेरिकी विदेश नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा’

इस्लामाबाद, 27 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के राजनीतिक और विदेश मामलों के विशेषज्ञ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के काल में अमेरिका की विदेश नीति में एक बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं करते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि आगे कठिन दौर से गुजरना होगा, क्योंकि वाशिंगटन नई दिल्ली के साथ घनिष्ठ संबंध बना सकता है।

अफगानिस्तान में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रुस्तम शाह मोहम्मद ने कहा कि वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान को लेकर ट्रंप के काल में अमेरिकी नीतियों में कोई बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं करते हैं, लेकिन इसके संकेत हैं कि अमेरिका और भारत में घनिष्ठता बढ़ सकती है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, मोहम्मद ने कहा, “अमेरिका को एक बड़ा सहयोगी चाहिए और इसके लिए नई दिल्ली उपयुक्त हो सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “अमेरिका और भारत के बीच नजदीकियां बढ़ने से अमेरिका और पाकिस्तान के बीच दूरियां और बढ़ेंगी।”

पेशावर विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र के निदेशक सरफराज खान ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ से कहा, ” मैं समझता हूं कि अफगानिस्तान में अमेरिकी बलों के लिए खतरा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव डालना जारी रखेगा।”

पाकिस्तानी पक्ष जोर देता है कि उत्तर वजीरिस्तान कबायली इलाके से हक्कानी नेटवर्क को खदेड़ दिया गया है जो साल 2014 में किए गए बड़े सैन्य हमले का नतीजा है।

हालांकि अमेरिका असंतुष्ट लगता है और अधिक करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव डालता है।

अफगानिस्तान के साथ काम करने वाले और अमेरिकी अधिकारियों के साथ कई बैठकों में भाग लेने वाले पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वास्तव में, अमेरिका ने अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया के लिए कूटनीतिक प्रयासों को बाधित किया है।

अमेरिकी ड्रोन हमले में तालिबान प्रमुख मुल्ला अख्तर मंसूर के मारे जाने का उल्लेख करते हुए अधिकारी ने कहा कि अफ गान समस्या के हल के लिए अमेरिका, पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान के बीच यहां हुई चतुष्पक्षीय वार्ता के तीन दिनों के बाद यह हमला किया गया था।

उधर, पाकिस्तानी सांसदों ने इस्लामाबाद से स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और अमेरिका की तरह अपने हितों की सुरक्षा करने का अनुरोध किया।

एक विपक्षी सांसद साजिद नवाज ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ से कहा, “अमेरका के साथ संबंधों की प्रकृति के कारण पाकिस्तान को काफी झेलना पड़ा है। इसलिए अमेरिका में चाहे किसी का शासन हो हमें अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए। दूसरों की ओर देखने की जगह हमें स्वतंत्र और आक्रामक विदेश नीति का अनुसरण करना चाहिए।”

सुरक्षा और विदेश मामलों पर लिखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार रहीमुल्ला युसुफजई का मानना है, “ट्रंप मुख्य रूप से आंतरिक मुद्दों पर ध्यान देंगे। मैं समझता हूं कि अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों की तरह अफगानिस्तान को लेकर उनकी पाकिस्तान से शिकायत बनी रहेगी।”

ट्रंप प्रशासन के संभावित दृष्टिकोण के संबंध में स्वतंत्र विश्लेषकों के संदेहों के बावजूद पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय जोर देकर कहता है कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति की पाकिस्तान के लिए काफी सद्भावना है।

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