अमेरिका के साथ भिडं़त व्यावहारिक सच्चाई : चीन

बीजिंग, 29 जनवरी (आईएएनएस)। आने वाले समय में चीन व अमेरिका के बीच भिडं़त के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि चीन की सेना के अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्ध एक व्यावहारिक सच्चाई बन गई है।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की आधिकारिक वेबसाइट पर एक लेख में केंद्रीय सैन्य आयोग में नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन के अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका एशिया में अपनी रणनीति को पुन: संतुलित करने में लगा है। पूर्वी व दक्षिण चीन सागर में सेना की तैनाती तथा दक्षिण कोरिया में मिसाइल रक्षा प्रणाली की तैनाती आग भड़काने के लिए चिंगारी का काम कर रहे हैं।

साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट ने लेख के हवाले से कहा, “राष्ट्रपति (अमेरिकी) के कार्यकाल के दौरान युद्ध या आज रात ही युद्ध की शुरुआत अब केवल नारा नहीं रहा। वे अब व्यावहारिक सच्चाई का रूप लेने जा रहे हैं।”

आधिकारिक पीपुल्स डेली ने रविवार को एक अन्य लेख में कहा कि चीन की सेना विदेशी उकसावे के मद्देनजर, समुद्र में सैन्य अभ्यास करेगी।

चीन का एकमात्र विमान वाहक पोत लियाओनिंग पिछले महीने ताइवान जलडमरूमध्य से होकर गुजरा था।

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनातनी में लगातार इजाफा हो रहा है। ताइवान तथा दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर ललकार कर उन्होंने चीन को क्रोधित कर दिया है।

ट्रंप ने ‘वन चाइना नीति’ को चुनौती दी, जो ताइवान को चीन को हिस्सा बताता है। बीते चार दशकों में अमेरिका की किसी सरकार ने ऐसा नहीं किया था।

ट्रंप ने दक्षिण चीन सागर में चीन की संप्रभुता को खुल्लमखुल्ला चुनौती दी, जबकि पिछले राष्ट्रपति बराक ओबामा इस मुद्दे पर तटस्थ रहे थे। उन्होंने हालांकि नौवहन की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए विवादित सागर में अमेरिकी युद्धक विमानों को भेजा था।

व्हाइट हाउस के नए प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा दखल को रोकेगा।

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