कर में छूट के साथ कल्याण योजनाओं पर खर्च बढ़ाया : जेटली (राउंडअप)

नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। कर से मिलने वाले राजस्व में 17 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को वित्त वर्ष 2017-18 का आम बजट पेश किया।

इसमें कल्याण योजनाओं को ज्यादा धन आवंटित किया गया है तथा व्यक्तिगत आयकर और छोटी कंपनियों के कर में मामूली राहत दी गई है। वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 फीसदी तक रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

वित्त मंत्री ने लोकसभा में प्रस्तुत किए गए अपने चौथे बजट में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की नकदी में सीमा 2,000 रुपये निर्धारित कर दी है। इससे अधिक का चंदा चेक या डिजिटल रूप से ही लेना होगा।

उन्होंने ने अपने बजट भाषण में कहा, “आजादी के 70 सालों बाद भी देश में राजनीतिक चंदे की पारदर्शी प्रणाली नहीं बन पाई है। अब राजनीतिक दल 2,000 रुपये तक का चंदा नकद ले सकेंगे और इसके लिए स्रोत बताने की जरूरत नहीं होगी। चुनाव आयोग ने इसका प्रस्ताव किया था। राजनीतिक दल 2,000 रुपये से अधिक का चंदा चेक और डिजिटल भुगतान के माध्यम से ही ले सकेंगे।”

आम बजट में नोटबंदी के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि इससे लंबे समय में पर्याप्त लाभ होगा और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा वर्तमान में जिस रफ्तार से पुनर्मुद्रीकरण किया जा रहा है, उससे नोटबंदी का असर अगले वित्त वर्ष पर पड़ने की संभावना नहीं है।

उन्होंने कहा कि बजट में मुख्य रूप से 10 क्षेत्रों पर जोर दिया गया है, जिनमें किसान, ग्रामीण आबादी, युवा, गरीब, अवसंरचना, वित्तीय क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक सेवाओं का वितरण, विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन और ईमानदारों का सम्मान करने वाली कर प्रणाली शामिल है।

ग्रामीण, कृषि और इससे जुड़ी सेवाओं के लिए आम बजट में 24 फीसदी बढ़ोतरी के साथ कुल 1,87,223 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा, “मैंने उत्पाद शुल्क और सेवा कर के वर्तमान ढांचे में कोई परिवर्तन नहीं किया है, क्योंकि जल्द ही इसकी जगह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ले लेगा।” उन्होंने कहा कि जीएसटी पर रुके पड़े सभी मुद्दों को जीएसटी कौंसिल में समाधान कर लिया जाएगा।

आम बजट में 2.5 लाख से 5 लाख रुपये के बीच की आय वाले व्यक्तियों के लिए कराधान की मौजूदा दर को मौजूदा 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। तीन लाख तक की आय को करमुक्त कर दिया गया है।

वित्तमंत्री ने इस मौके पर 2.5 लाख रुपये और 5 लाख रुपये आय स्लैब वाले सभी नागरिकों से 5 प्रतिशत कर की छोटी सी अदायगी कर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनने की अपील की। इसके साथ ही व्यावसायिक आय से इतर 5 लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले करदाताओं के लिए सिर्फ एक पृष्ठ का आयकर रिटर्न फॉर्म भरना होगा।

जेटली ने आम बजट 2017-18 पेश करते हुए कहा कि कराधान का वर्तमान बोझ मुख्यत: ईमानदार करदाताओं और वेतनभोगी कर्मचारियों पर है, जो अपनी आय को सही रूप में दर्शाते हैं। इसलिए नोटबंदी के बाद इस वर्ग के लोगों की यह उम्मीद जायज है कि उन पर से कर का बोझ कम किया जाएगा।

मंत्री ने यह भी कहा कि यदि निम्न आय स्लैब के लिए टैक्स की दर को सामान्य रखा जाता है, तो बड़ी संख्या में लोग कर दायरे में आएंगे। उन्होंने भारत के सभी नागरिकों से यह अपील की कि यदि उनकी आय 2.5 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के सबसे निचले स्लैब के अंतर्गत आती है तो वे 5 प्रतिशत कर की छोटी सी अदायगी करते हुए राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें।

छोटे और मझोले उद्यमियों को कर में राहत दी गई है। 50 लाख का टर्नओवर जिन उद्यमियों का है, उन्हें अब 30 फीसदी के बजाए 25 फीसदी कर देना होगा। बड़े कारपोरेट के लिए करों की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

रक्षा बजट में 10 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2.74 लाख करोड़ कर दिया गया है।

पहली बार रेल बजट को आम बजट में शामिल किया गया है। रेलवे के लिए कुल आवंटन में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।

विपक्षी दलों ने बजट का विरोध करते हुए कहा कि यह दिशाहीन है। वहीं, उद्योग जगत ने बजट प्रस्तावों का समर्थन किया है।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने एक बयान में कहा, “कुल मिलाकर बजट से भारतीय और विदेशी उद्योग जगत को सकारात्मक संदेश मिला है कि सरकार वित्तीय घाटे पर काबू रखते हुए विकास को बढ़ावा देनेवाली हर संभव कदम उठाती रहेगी।”

फिक्की के अध्यक्ष पंकज पटेल ने बताया, “मैं समझता हूं कि इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण बात राजनीतिक दलों के चंदे के क्षेत्र में सुधार करना है।”

उन्होंने कहा कि नोटबंदी से काले धन को निशाना बनाया गया और राजनीतिक दलों के चंदे के नियमन से भ्रष्टाचार के जड़ पर प्रहार करने में मदद मिलेगी।

वित्तमंत्री ने निवेशकों को राहत देते हुए कैपिटल गेन, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

आम बजट के बाद सेंसेक्स में 485.68 अंकों या 1.76 फीसदी की तेजी देखी गई। वहीं, निफ्टी 155.10 अंकों या 1.81 फीसदी की बढो़तरी के साथ 8,716.40 अंकों पर बंद हुआ।

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