संयुक्त राष्ट्र, 22 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2040 तक लगभग 60 करोड़ बच्चों को पानी की जबरदस्त किल्लत से जूझना पड़ेगा। दुनिया के चार में से एक बच्चा बेहद कम मात्रा में पानी के स्रोत वाले इलाके में रह रहा होगा।
समाचार एजेंसी एफे न्यूज के मुताबिक, यह रिपोर्ट यूएन इंटरनेशनल चिल्ड्रेन्स इमरजेंसी फंड (यूनीसेफ) द्वारा मंगलवार को जारी की गई।
यूनीसेफ ने पानी के अभाव और जलवायु परिवर्तन की समस्या के कारण बच्चों के जीवन को खतरा होने के संबंध में आगाह किया।
यूनीसेफ के कार्यकारी निदेशक एंथोनी लेक ने कहा, “पानी प्रमुख तत्व है, इसके बिना कुछ नहीं पनप सकता, लेकिन दुनिया भर में साफ पानी का अभाव लाखों बच्चों का जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य खतरे में डाल रहा है।”
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “यह संकट तब तक बढ़ेगा, जब तक हम सामूहिक रूप से कोई कदम नहीं उठाते।”
रिपोर्ट में दर्शाया गया कि जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ बढ़ती खपत और मांग की तुलना में पानी की उपलब्धता में कमी हो रही है। फिलहाल 36 देश पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं।
रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ते तापमान, समुद्र का स्तर बढ़ने, पिघलती बर्फ और सूखे में वृद्धि जैसे कारकों से भी प्रभावित होती है।
फिलहाल 63 करोड़ लोग पानी की कमी का सामना कर रहे हैं और रोज पांच साल से कम आयु के 800 बच्चे दूषित पानी के कारण डायरिया से ग्रसित होकर दम तोड़ रहे हैं।
यूनीसेफ के मुताबिक, पानी की पर्याप्त आपूर्ति में कमी के कारण बच्चों को घातक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है और कई जगह तो बच्चे घंटों पानी इकट्ठा करने में समय बिताते हैं, जिसके चलते वे स्कूल भी नहीं जा पाते हैं।
रिपोर्ट में आने वाले सालों के लिए पानी की उपलब्धता और मांग के संबंध में सरकारों से संभावित परिवर्तन की योजना बनाने का आग्रह किया गया है।
यूनीसेफ के मुताबिक, पानी की समस्या से जूझ रहे बच्चों को सुरक्षित तरीके से पानी उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चहिए।
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