द्विपक्षीय सहयोग की बढ़ती संभावनाओं के साथ दोनों पक्ष भविष्य में अधिक सकारात्मक परिणामों तक पहुंचने और अधिक परिपक्व द्विपक्षीय संबंधों की पूर्ण संभावना को हासिल करने को लेकर पूरी तरह से आशावादी बने हुए हैं।
इन दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय संबंधों के अधिक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली होने से हाल ही सालों में चीन और यूरोप के बीच अधिक उच्चस्तरीय आदान-प्रदान देखे गए हैं।
चीन ने यूरोप के साथ अपने सहयोग को खुले दिल से स्वीकार किया है।
2013 में शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद से उन्होंने चीन और यूरोप के बीच के रिश्तों को बहुत महत्व दिया है और इस क्षेत्र की छह यात्राएं कीं।
2014 में शी ने नीदरलैंड, फ्रांस, बेल्जियम और जर्मनी का भी दौरा किया।
शी ने 2015 में ब्रिटेन का दौरा किया और इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने 21वीं सदी की ‘वैश्विक व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के लिए चीन-ब्रिटेन संबंध को व्यापक करने का निर्णय लिया।
मार्च 2016 के दौरान शी ने चेक गणराज्य के दौरे पर समान हितों में सहयोग की तलाश के नए युग में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का काम किया।
इसके बाद जून में हुए सर्बिया और पोलैंड दौरे ने दोनों देशों के साथ चीन के संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की दिशा दी।
शी ने इस साल जनवरी में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित 2017 विश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में हिस्सा लिया। यह 21वीं सदी में एक चीनी राष्ट्रपति द्वारा अल्पाइन देश का पहला दौरा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय देशों के लिए यह समय है कि वह चीन पर अपनी निराधार चिंताओं को दूर कर भविष्य के व्यावहारिक सहयोग पर ध्यान दें।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और 16 मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के बीच बेल्ट एंड रोड परियोजना के तहत सहयोग अधिक महत्वपूर्ण हुआ है।
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