वाशिंगटन, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा है कि ईरान साल 2015 में किए गए परमाणु समझौते का पालन कर रहा है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (प्रतिनिधि सभा) के अध्यक्ष पॉल रयान को लिखे एक पत्र में टिलरसन ने पुष्टि की कि ईरान साल 2015 के परमाणु समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन कर रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान द्वारा समझौते के पालन को लेकर यह पहला प्रमाणपत्र जारी किया है। पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी की तरह ही टिलरसन को हर 90 दिनों के अंतराल पर कांग्रेस को प्रमाणपत्र भेजना होता है।
एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को ‘आतंकवाद प्रायोजित करने वाला प्रमुख राष्ट्र’ करार देते हुए टिलरसन ने कांग्रेस को सूचित किया कि ट्रंप सरकार ने 2015 के परमाणु समझौते की पूर्ण समीक्षा का निर्देश दिया था, ताकि यह आकलन किया जा सके कि ईरान को प्रतिबंधों में दी जा रही ढील अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों के अनुरूप है या नहीं।
ट्रंप ने अपने प्रचार अभियान के दौरान ईरान के परमाणु समझौैते की आलोचना करते हुए कहा था कि यह ‘अब तक का सबसे बदतर समझौता’ है।
ईरान तथा दुनिया की छह शक्तियों ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस तथा अमेरिका ने जुलाई 2015 में एक परमाणु समझौैता किया था, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और इसके बदले में उस पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील प्रदान करना था।
जनवरी 2016 में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने पुष्टि की थी कि ईरान परमाणु समझौते का पालन कर रहा है, जिसके बाद उस पर लगे कुछ अंतर्राष्ट्रीयप्रतिबंध हटा लिए गए थे।
इन प्रतिबंधों से ईरान द्वारा कच्चे तेल का निर्यात बेहद कम हो गया था। प्रतिबंध हटने के बाद से ईरान द्वारा भारत को कच्चे तेल के निर्यात में भारी बढ़ोतरी हुई है।
ईरान को कच्चे तेल के उत्पादन में 12 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती के ओपेक के समझौैते से छूट मिली हुई है, जो एक जनवरी से लागू हुआ था। तेहरान के लिए यह किसी विजय से कम नहीं, क्योंकि उसका तर्क है कि काफी लंबे समय में उसने जो बाजार खोया है उसे प्राप्त करने के लिए उसे समय की जरूरत है।
dharmpath.com dharmpath