भगवा दुर्गा फतह करने की संघ और विहिप की जद्दोजहद,जीत के के लिए झोंकी ताकत…

संघ और विहिप के नेता अयोध्या में कर रहे है कैम्प,जिले के आसपास की सभी सीटो पर किला फतह करने की तैयारी  … 

imagesअनूप कुमार

अयोध्या । जैसे जैसे मतदान की तारीख नज़दीका आ रही है अयोध्या फैज़ाबाद संसदीय सीट का सियासी पारा चढ़ता ही जा रहा है जहां सपा,बसपा ,कांग्रेस जैसी बड़ी सियासी पार्टिया चुनावी समर में अपनी ताकत झोंक रही है वही आम आदमी पार्टी,पीस पार्टी जैसे संगठन भी अपने सीमित संगठन के दम पर अपनी मौजूदगी को और मजबूत बनाने की जुगत में है हर पार्टी का अपने एजेंडे में शामिल मुद्दो को आगे कर चुनावी बैतरणी पार करने की कोशिश में है कोई जातीय समीकरण तो कोई व्यक्तिगत छवि को आगे कर अपना चुनावी माहौल बनाने में जुटा है ऐसे में भाजपा जैसी पार्टी के लिए कम से कम अयोध्या फैज़ाबाद संसदीय सीट पर एक ऐसा मुद्दा है जिसने भाजपा को फर्श से अर्श पर पहुँचाकर प्रदेश ही नही केंद्र में सत्ता के शिखर पर पहुचाया है और साल 2014 के लोकसभा चुनावो में तो भाजपा ने उस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में भी शामिल कर लिया है जी हाँ हम बात कर रहे है उन्ही भगवान राम की और उनके मंदिर के मुद्दे की जिसके समर्थन की सियासत भाजपा और उससे जुड़े दल दशको से करते चले आ रहे है और खिलाफत के नाम पर वोटो का ध्रुवीकरण करने वाले दलों की भी लम्बी फेहरिस्त है,लेकिन इस बार चुनावी घोषणा पत्र में राम मंदिर मुद्दे के शामिल हो जाने से भाजपा एक बार फिर अपने पुराने अंदाज़ में दिख रही है और राम मंदिर मुद्दे को आगे कर विश्व हिन्दू परिषद और संघ परिवार भाजपा के लिए चुनावी मैदान तैयार करने में जुट गए है। अयोध्या में संघ और विश्व हिन्दू परिषद के करिया कलापो का केंद्र रहने वाले कारसेवकपुरम परिसर में इन दिनों माहौल अलग है बीते कई चुनावो में शांत से दिखने वाले कारसेवकपुरम में इन दिनों संघ और विहिप के नेताओ और कार्यकर्ताओ की मैराथन बैठको का दौर जारी है,राजनीती की मुख्य धारा से अपने को अलग थलग रखने वाले विहिप और संघ जैसे हिंदूवादी संथन इस बार के लोकसभा चुनावो में भाजपा के समर्थन में खुलकर लामबंद होते दिख रहे है बीते साल 2009 के लोकसभा चुनाव और 2012 के विधान सभा में फैज़ाबाद और आसपास की आधा दर्जन सीटो पर भाजपा के प्रदर्शन को देखते हुए इस बार संघ और विहिप इन सीटो पर जीत के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है वही अयोध्या फैज़ाबाद संसदीय सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल  पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी लल्लू सिंह तीसरे पायदान पर लुढक गए थे और पूरे देश में भाजपा की राजनीती का केंद्र रहने वाली अयोध्या फैज़ाबाद संसदीय सीट पर भाजपा की करारी शिकश्त पर विपक्षियो ने जमकर खिल्ली उड़ाई थी वही पार्टी की इस हार के लिए अंदरखाने में जो वजह सामने आई वो पार्टी की आपसी कलह और भीतरघात बतायी गयी जबकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े राष्ट्रीय नेता भी इसी लोकसभा से ताल्लुक रखते है ऐसे में इस बार इस तरह की कोई वजह पार्टी के लिए कमज़ोर कड़ी न साबित हो इसके लिए संघ और विहिप आलाकमान के विशेष निर्देश पर अयोध्या भेजे गए दूत पार्टी के सभी नेताओ को एक मंच पर लाने की कसरत में जुटे है जिसके लिए अयोध्या स्थित विहिप के प्रांतीय मुख्यालय कारसेवकपुरम में बैठको का दौर जारी है भले ही ये बैठके गुप्त रूप से की जा रही हो लेकिन इसका सार्वजनिक असर हो और सकारात्मक हो इसके लिए संगठन से जुड़े लोगो को मंत्र दिए जा रहे है सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ अयोध्या में होने वाली इन बैठको को मुख्य रूप से विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय ,केंद्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह,पुरुषोत्तम नारायण सिंह, मजदूर संघ के प्रदेश संगठन मंत्री अनुपम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री मनोज कांत मिश्र सहित विहिप के अन्य नेता सम्बोधित कर रहे है,गौरतलब है की बीते चुनावी नतीजों को दृष्टिगत रखते हुए अयोध्या फैज़ाबाद संसदीय सीट इस बार भाजपा और हिंदूवादी संगठनो के लिए प्रतिष्ठा का विषय है लेकिन इसके साथ है पडोसी जनपद अम्बेडकरनगर, सुल्तानपुर,गोंडा,बस्ती,बहराइच,बाराबंकी में भी भाजपा जीत की विजय पताका फहराये इसके लिए कार्यकर्ताओ में जोश भरा जा रहा है जहां एक तरफ ये हिंदूवादी संगठन अपनी व्यक्तिगत छवि को ढाल के तौर पर प्रयोग कर भाजपा के लिए चुनावी जमीन तैयार करने में जुटे है वही भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की छवि इस चुनावी जमीन को तैयार करने में खाद का काम कर रही है, राम मंदिर मुद्दा जहां इस बार के चुनाव में मुखर होकर भाजपा के लिए टॉनिक का काम करता दिख रहा है वही मोदी फैक्टर के जरिये युवाओ को जोड़ने की मुहीम भी परवान चढ़ाई जा रहे है पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जहां राम मंदिर के निर्माण से ही अयोध्या के विकास की बात कह रहे हो वही विपक्ष के लोग इस मुद्दे पर एक बार फिर भाजपा को घेरने की हर संभव कोशिश में जुटे है लेकिन अगर बात अयोध्या के आम आदमी की करे तो यहां के लोगो के पास रोजगार के नाम पर न ही कोई कारखान है नाही एक बड़ा व्यावसायिक केंद्र ऐसे में आने वाली 7 मई को जनता को ही तय करना है की राम से रोटी जुडी है या राम के नाम पर एक बार फिर वो छले जाएंगे। 

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