मोदी ने श्रीलंका में बहुभाषी समाज में शांति व समरसता पर जोर दिया (लीड-1)

डिकोया (श्रीलंका), 12 मई (आईएएनएस)। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के तमिल बहुल चाय बागान क्षेत्र के अपने दौरे पर शुक्रवार को कहा कि एक शांतिपूर्ण तथा समरस बहुभाषी समाज से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती। उन्होंने एकता के सूत्रों को अलग नहीं, बल्कि मजबूत करने का आह्वान किया।

यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की श्रीलंका के तमिल बहुल चाय बागान इलाके की पहली यात्रा थी।

चाय बागानों में काम करने वाले भारतीय मूल के तमिल श्रमिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विविधता से खुशियां आती हैं, न कि लोगों के बीच झगड़े होते हैं। मोदी के भाषण के दौरान उनके साथ श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे भी थे।

प्रधानमंत्री ने कहा, “शांतिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण बहुभाषी समाज से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती।”

मोदी ने दो साल पहले श्रीलंका का दौरा किया था और उस वक्त वह देश के उत्तरी हिस्से में स्थित जाफना भी गए थे।

शुक्रवार के अपने भाषण में मोदी इस बात का जिक्र करना नहीं भूले कि वह इस खूबसूरत पहाड़ी इलाके की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।

चाय बागान वाले तमिल देश के उत्तर तथा पूरब में रहने वाले तमिलों से काफी अलग हैं। उत्तर तथा पूरब में रहने वाले तमिलों ने बीते तीन दशकों से अधिक समय तक अपने अधिकारों के लिए हिंसक संघर्ष किया था।

तमिल संतों तथा विद्वानों की उक्तियों को मिलाकर तैयार किए गए 30 मिनट के भाषण में मोदी ने दूरस्थ इलाकों में 10,000 अतिरिक्त मकानों के निर्माण में भारतीय सहायता की भी घोषणा की। इन इलाकों में लाभार्थियों के लिए स्वामित्व के आधार पर 4,000 मकान पहले ही तैयार हो चुके हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने फैसला किया है कि वह 1990 एंबुलेंस सेवा का विस्तार अन्य प्रांतों तक करेगा। फिलहाल यह सेवा पश्चिमी व दक्षिणी प्रांतों तक पहुंचाई जा रही है।

मोदी ने आश्वासन दिया कि वह श्रीलंका में तमिलों तथा अन्य लोगों की आर्थिक प्रगति के सफर में पूरा सहयोग करेंगे।

उन्होंने कहा, “आज हम आपके पूर्वजों, मजबूत इच्छाशक्ति व उत्साह वाले उन पुरुषों व महिलाओं को याद करते हैं, जिन्होंने भारत से सिलोन (श्रीलंका) तक की यात्रा की। सफर कठिन था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हम उन्हें याद करते हैं और उनके जज्बे को सलाम करते हैं।”

मोदी ने कहा, “आप तमिल माताओं की संतान हैं। आपकी भाषा दुनिया की सबसे प्राचीन पारंपरिक भाषाओं में से एक है। इसके साथ ही आप सिंहली भाषा भी बोलते हैं, जो गर्व का विषय है। भाषा केवल संपर्क का ही माध्यम नहीं, बल्कि यह संस्कृतियों तथा लोगों को एक सूत्र में पिरोती है।”

तमिलों तथा सिंहलियों के बीच की कड़ी को याद करते हुए मोदी ने कहा कि वे ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। कैंडी के सिंहली नायक नरेशों के घरों के वैवाहिक संबंध मदुरै तथा तंजावुर के नायक राजाओं से थे। सिहला व तमिल दरबारों की भाषाएं थीं।

उन्होंने कहा, “हिंदू तथा बौद्ध मंदिर व मठ दोनों ही पवित्र व श्रद्धेय माने जाते थे। हमें एकता व समरसता के इन सूत्रों को मजबूत करने की जरूरत है, अलग करने की नहीं।”

भारतीय मूल के तमिलों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हमें एकता तथा समरसता की भावना को मजबूत करना है और आपको इसका एक स्तंभ बनना होगा।”

सिलोन वर्कर्स कांग्रेस के संस्थापक सौम्यामूर्ति थोंडमान की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने उन परेशानियों का स्मरण किया, जिन्हें भारत से श्रीलंका आने के बाद उनके (तमिलों) पूर्वजों ने झेला था।

मोदी ने कहा कि नए-नए स्वतंत्र हुए देश में तमिलों को अपनी पहचान साबित करने की राह में कई रोड़ों का सामना करना पड़ा। इस संदर्भ में उन्होंने दिवंगत थोंडामन का जिक्र किया, जिन्होंने चाय बागानों में काम करने वाले तमिलों की समृद्धि तथा उनकी आर्थिक तरक्की के लिए कड़ा परिश्रम किया।

उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि एक बार महात्मा गांधी ने कैंडी, नुवाड़ा एलिया तथा अन्य जगहों के चाय बागानों का दौरा किया था। इस ऐतिहासिक यात्रा की याद में भारतीय सहायता से साल 2015 में मताले में महात्मा गांधी केंद्र की स्थापना की गई।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हम आपको हमारे अबाध क्रम के निर्बाध हिस्से के तौर पर देखते हैं। हम श्रीलंका तथा भारत के बीच इस संबंध को विकसित करना चाहते हैं और ऐसा संबंध स्थापित करना चाहते हैं, जिसमें मेरी सरकार की प्राथमिकता सभी भारतीयों तथा सभी श्रीलंकाइयों की प्रगति हो।”

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने सन् 1947 से ही श्रीलंका सरकार के सहयोग से शिक्षा, स्वास्थ्य व सामुदायिक विकास केंद्रों में कार्यक्रम चलाए हैं। इसके तहत 700 वजीफे उपलब्ध हैं।

चाय बागान में काम करने वाले तमिलों के कठिन परिश्रम की प्रशंसा करते हुए मोदी ने कहा कि सिलोन चाय दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि इसके पीछे तमिलों का पसीना और कठिन परिश्रम है। श्रीलंका वैश्विक स्तर पर चाय का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है और इससे 1.5 अरब डालर विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।

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