‘भारत अन्य देशों को बेल्ट एंड रोड परियोजना में भागीदारी से नहीं रोक सकता’

बीजिंग, 15 मई (आईएएनएस)। चीन के एक दैनिक समाचार पत्र का कहना है कि भारत अपने पड़ोसी देशों को चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना में शामिल होने से नहीं रोक सकता।

बीजिंग, 15 मई (आईएएनएस)। चीन के एक दैनिक समाचार पत्र का कहना है कि भारत अपने पड़ोसी देशों को चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना में शामिल होने से नहीं रोक सकता।

समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया है कि चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना को लेकर भारत का विरोध अफसोसनजक है।

गौरतलब है कि भारत ने बीजिग में हो रही दो दिवसीय बेल्ट एंड रोड परियोजना का बहिष्कार किया है।

समाचार पत्र में छपे लेख के मुताबिक, अभी भी बहुत देर नहीं हुई है, भारत अपना फैसला बदलकर इस सम्मेलन में शामिल हो सकता है।

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, “चीन कभी भी किसी भी देश को बेल्ट एंड रोड सम्मेलन में शामिल होने का दबाव नहीं बनाएगा।”

ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित वांग जिएमे के लेख के मुताबिक, “यह कोई समस्या नहीं है, बल्कि अफसोसजनक है कि भारत अभी भी इसका पुरजोर विरोध कर रहा है, वह भी तब जब चीन बार-बार कह चुका है कि वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की वजह से कश्मीर मुद्दे पर अपने रुख में बदलाव नहीं करेगा।”

लेख के मुताबिक, “भारत ने कर्ज के बोझ को भी अपनी चिंताओं में से एक बताया है। उसका कहना है कि वह उन परियोजनाओं से बचना चाहता है, जिससे कर्ज का बोझ बढ़े।”

रिपोर्ट के मुताबिक, “यह अजीब है कि खिलाड़ियों की तुलना में दर्शक अधिक बेचैन हैं। भारत को अपने पड़ोसियों के कर्ज बोझ की चिंता है।”

लेख के मुताबिक, “पाकिस्तान और चीन ने शनिवार को हवाईअड्डे, बंदरगाह और राजमार्गो के निर्माण के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये के नए समझौते किए।”

लेख में कहा गया है,”नेपाल ने बेल्ट एंड रोड परियोजना में शामिल होने के लिए चीन के साथ समझौता किया और नेपाल सीमा पार रेल मार्ग के निर्माण के लिए चीन के साथ संपर्क में है। इस रेल मार्ग की लागत आठ अरब डॉलर तक जा सकती है।”

लेख के मुताबिक, “विभिन्न देशों के इस रुख को देखकर भारत के पास कोई रास्ता नहीं है कि वह पड़ोसी देशों को चीन के साथ इस परियोजना में शामिल होने से रोक सके।”

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, “चीन ने इस परियोजना में शामिल होने के लिए भारत को औपचारिक तौर पर आमंत्रित किया है। यदि भारत इसका हिस्सा नहीं बनना चाहता तो वह दर्शकदीर्घा का हिस्सा बन सकता है। यदि भारत अपना विचार बदलता है तो उसकी भूमिका के लिए रास्ते खुले हैं।”

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