चीन ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान में शांति की उम्मीद जताई

बीजिंग, 14 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान द्वारा चीन के पाकिस्तान व अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात कहे जाने के एक दिन बाद चीन ने उम्मीद जताई कि दोनों देश सहयोग मजबूत करेंगे और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बरकरार रखेंगे।

बीजिंग, 14 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान द्वारा चीन के पाकिस्तान व अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात कहे जाने के एक दिन बाद चीन ने उम्मीद जताई कि दोनों देश सहयोग मजबूत करेंगे और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बरकरार रखेंगे।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, “अफगान की शांति प्रक्रिया के ईमानदार समर्थन के जरिए हमें उम्मीद है कि संबंधित देश आतंकवाद से लड़ने के लिए सहयोग व एकता को मजबूत कर सकते हैं और क्षेत्र की शांति और स्थिरता बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

लू ने कहा कि इससे क्षेत्र के विकास व प्रगति के लिए एक वातावरण तैयार होगा।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के कार्यालय ने मंगलवार को कहा था कि चीन ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी और एक बैठक आयोजित करने में मदद की बात कही थी, ताकि दोनों देश अपने संबंधों में सुधार कर सके।

एक बयान में कहा गया कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी का काबुल दौरा निर्धारित है, जहां वह अफगान अधिकारियों से मिलेंगे और वह अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अमेरिका और चीन के बीच एक बैठक आयोजित करने की संभावना पर चर्चा करेंगे।

गनी ने एक बैठक में कहा, “यह पहली बार है कि चीन अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया में एक मध्यस्थ बनना चाहता है। पाकिस्तान के साथ शांति हमारी मांग है और इसका हल अफगानिस्तान सरकार व पाकिस्तान सरकार के बीच किया जाना चाहिए।”

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध 31 मई को हुए घातक बम विस्फोट की वजह से बिगड़े, जिसमें 150 लोग मारे गए थे।

इस हमले की किसी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन अफगानिस्तान सरकार ने इस घटना के लिए हक्कानी नेटवर्क और पाकिस्तान के आईएसआई को जिम्मेदार ठहराया था।

अफगानिस्तानी राष्ट्रपति के उप प्रवक्ता नजीबुल्लाह आजाद ने कहा, “इस बार की चारपक्षीय बैठक, जो अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अमेरिका व चीन के बीच आयोजित होगी, वह पहले की बैठकों से अलग होगी।”

इस बैठक में पाकिस्तान को अफगानिस्तान की विद्रोहियों से लड़ने की नीति का समर्थन जरूर करना चाहिए।

आजाद ने कहा कि अफगानिस्तान ने साक्ष्य एकत्र किए हैं कि पाकिस्तान आतंकवादियों का समर्थन कर रहा है और इसे हमने नाटो, अमेरिकी कांग्रेस और दूसरे संगठनों से साझा किया था।

उन्होंने कहा, “जब जरूरत होगी, साक्ष्य संयुक्त राष्ट्र को प्रदान किए जाएंगे।”

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