अनिल श्रीवास्तव
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पारा—गत दिनो जिले के कलेक्टर चन्द्रशेखर बोरकर ने एक मिटिंग के दोरान स्कूलीन शिक्षा विभाग को पढने वाले बच्चो की छात्रवृति को लेकर निर्देश दिए की शिघ्र ति शिघ्र समस्त बच्चो की समग्र पोर्टल पर आईडी बनाकर मेपिंग कि जाए ताकी समय पर बच्चो को छात्रवृति दि जा सके इस दोरान आईडी प्रूफ मेंपिंग के लिए परीवार के खाद्यान कुपन का सहारा लेकर मेपिग का कार्य किया जावे साथ ही यह सूनिश्चित किया जावे की कूपन व स्कूल मे बच्चे का नाम का मिलान एक ही हे तो पोर्टल पर दर्ज किया जावे।
उक्त आदेश के कारण यदी ऐसा हूआ तो ऐसी स्थिति मे जिले के भर के हजारो छात्र छात्राए छात्रवृति मिलने से वंचित रह जाएगे।इस का मूख्य कारण हे जिले भर मे लगभग हर छात्र के दो दो नाम होना।समूचे आदीवासी अंचल मे लडका हो या लडकी सभी के दोदो नाम हे स्कूलो मे दर्ज नाम कूछ ओर वही घरेलू नाम कूछ ओर हे ऐसी स्थिति मे पंचायत द्वारा बनाए गए खाद्यान कूपन मे दर्ज नामो मे भारी गढबडी हे जिस के चलते व कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देश के बाद हजारो संख्या मे छात्र छात्रवृति मिलने से रह जाएगे।
इस तरह बने डबल नाम—
समूचे आदीवासी अंचल मे हर लडके लडकी के दो नाम रखने का चलन हे उनका घरेलू नाम जो कि बच्चे के पेदा होने पर परिजनो ने बोलचाल के लिए प्रेम से रख दिया था वही नाम उस समय से खाद्यान कूपन मे जूड गया वही जब समय पर स्कूल मे दाखील करवाया तो उस वक्त बच्चे के बडे होने पर शिक्षको के कहने या मिलने वाले के समझाने पर दाखीले मे नाम कूछ ओर लिखवाया जिसके कारण प्रत्येक बालक बालका के दो दो नाम हो गए।इस तरह कूपन मे नाम अलग हे व स्कूल मे नाम अलग हे।ऐसी स्थिति मे मेपिग के दोरान खाद्यान कूपन मे व स्कूल मे नाम एक ही नही मिलने कि दशा मे बच्चो को छात्रवृति मिलना मूस्कील होगी।
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