प्रोजेक्ट लीप ने ओलम्पिक गोल्ड क्वेस्ट से हाथ मिलाया

पुणे, 18 जुलाई (आईएएनएस)। गगन नारंग स्पोर्ट्स प्रोमोशन फाउंडेशन (जीएनएसपीएफ) ने अपने महत्वाकांक्षी प्रोग्राम-प्रोजेक्ट लीप के लिए ओलम्पिक गोल्ड क्वेस्ट (ओजीक्यू) के साथ हाथ मिलाया है। प्रोजेक्ट लीप का मकसद देश में युवा निशानेबाजों की खोज करना और उन्हें प्रशिक्षित करना है।

प्रोजेक्ट लीप के तहत पहला राइफल कैम्प बालेवाडी (पुणे) में इस सप्ताह समाप्त हुआ। कैम्प काफी सफल रहा और इसमें शिरकत करने वाले निशानेबाजों, कोचों और सहयोगी स्टाफ ने ऐसे और कैम्प आयोजित किए जाने की इच्छा जाहिर की।

प्रोजेक्ट लीप के तहत जीएनएसपीएफ देश के विभिन्न क्षेत्रों से 23 युवा और प्रतिभाशाली निशानेबाजों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का चैम्पियन बनाने के लिए प्रशिक्षण दे रहा है। इनका चयन 57 निशानेबाजों के बीच से किया गया है।

नारंग द्वारा स्थापित और संचालित फाउंडेशन में चुने गए निशानेबाजों को शीर्ष स्तर के अंतर्राष्ट्रीय कोचों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है और इसके साथ-साथ वे अत्याधुनिक सुविधाओं से भरपूर शूटिंग रेंज में अभ्यास कर रहे हैं। उन्हें एक साल का खेल विज्ञान का सहयोग भी दिया जा रहा है ताकि वे देश के उभरते निशानेबाज बन सकें।

चुने गए निशानेबाजों में 12 पुणे, तीन हैदराबाद एवं सिकंदराबाद, दो-दो भुवनेश्वर और गुजरात से हैं। इस सूची में 12 लड़कियां और 11 लड़के हैं। जबलपुर की महिला अग्रवाल और गुजरात की इलानेविल संयोग से राष्ट्रीय जूनियर टीम का हिस्सा हैं और हाल ही में जर्मनी में आयोजित जूनियर विश्व चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

12 निशानेबाज एअर राइफल वर्ग से हैं और उन्हें स्लोवाकियाई कोच एंटन बेलाक और ओलम्पिक पदक विजेता गगन नारंग की देखरेख में प्रशिक्षण के लिए पुणे कैम्प में बुलाया गया। बाकी के 11 एअर पिस्टल वर्ग से हैं और अभी वे पुणे में कोरियाई कोच किम सियोनिल की देखरेख में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

दोनों विदेशी कोच चुने गए खिलाड़ियों की प्रतिभा से बेहद खुश हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम की रूपरेखा और इसके आयोजन पर खुशी जाहिर की है। पुणे में जो कैम्प आयोजित किया गया, उस तरह के पांच कैम्प आयोजित किए जाने हैं। इस काम में जीएनएसपीएफ और ओजीक्यू की विशेषज्ञता शामिल है।

गगन ने कहा, “ओजीकयू के माध्यम से हमें न सिर्फ वित्तीय मदद मिल रही है बल्कि स्पोर्ट्स साइंस, न्यूट्रिशन और रिकवरी की दिशा में भी सहयोग मिलेगा। यह जूनियर निशानेबाजों की सफलता के लिए काफी जरूरी कारक हैं। हम ओजीक्यू के साथ करार के बाद अपनी योजना को सफल होते देख रहे हैं। ओजीक्यू ने ऐसे समय में मेरी मदद की है, जब मुझे इसकी वाकई जरूरत थी। मैं जानता हूं कि ओजीक्यू खिलाड़ियों को सिर्फ वित्तीय सहायता प्रदान नहीं करता बल्कि भावनात्मक रूप से भी उनका ख्याल रखता है। अपने विजन 2024 और उसके आगे के लिए मैं चाहता हूं कि मेरे युवा एथलीटों को इसी तरह का सहयोग, समर्थन और मार्गदर्शन मिले।”

ओजीक्यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विरेन रासकीन्हा ने कहा, “प्रोजेक्ट लीप के साथ ओजीक्यू का जुड़ना गर्व की बात है। गगन पहले ऐसे एथलीट हैं, जिन्हें ओजीक्यू ने 10 साल पहले सहयोग दिया था। अब हम प्रोजेक्ट लीप के माध्यम से गगन की संस्था-जीएनएसपीएफ के साथ जुड़कर गर्व महसूस कर रहे हैं। ओजीक्यू ने देखा कि गगन ने इस प्रोजेक्ट के साथ बेहद समृद्ध वैज्ञानिक पद्दति जोड़ रखा है और गगन की टीम ने इसे लागू के लिए शानदार प्लान तैयार किया है। हमने महसूस किया कि प्रोजेक्ट लीप की लम्बी अवधि का विजन ओजीक्यू जूनियर स्कॉलरशिप प्रोग्राम से मेल खाता है।”

साल 2011 में स्थापित होने के बाद से जीएनएसपीएफ निरंतर काम कर रहा है और उसने नए चैम्पियन उबारे हैं। इसमें पूजा घटकर, महिला तुरही अग्रवाल, अपूर्वी चंडेला, हीना सिद्धू और रानी सरनोबाट का नाम शामिल है। गगन द्वारा शुरू ‘गन फॉर ग्लोरी’ अकादमियां पुणे, जबलपुर, मुंबई, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और सिकंदराबाद में हैं।

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