नडाल, फेडरर कुछ नया सीखते रहते हैं इसलिए सफल हैं : पेस

कोलकाता, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। भारत के वरिष्ठ टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने गुरुवार को कहा कि स्पेन के राफेल नडाल और स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर के सफल होने का कारण उनका अपने खेल में परिवर्तन करते हुए नयापन लाना है।

कोलकाता, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। भारत के वरिष्ठ टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने गुरुवार को कहा कि स्पेन के राफेल नडाल और स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर के सफल होने का कारण उनका अपने खेल में परिवर्तन करते हुए नयापन लाना है।

पेस का मानना है कि यह दोनों खिलाड़ी उम्र को परे रखते हुए अपने खेल में कुछ नया करते और सीखते रहते हैं।

यहां एसईएनसीओ गोल्ड के आभूषण संग्रह के लांच पर आए पेस ने कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, “वे लोग अपने खेल में कुछ नया करते रहते हैं। वह लगातार नए शॉट्स सीखते रहते हैं। फेडरर की हाल ही में सर्जरी हुई है। वह स्वास्थलाभ से गुजरे और वापसी करते हुए दो ग्रैंड स्लैम जीते। आप राफेल नडाल को देखें। उनको पिंडली और घुटने में परेशानी थी।”

पेस ने कहा, “पिछले साल के अंत में यह दोनों खिलाड़ी कोर्ट से बाहर थे जब एंडी मरे और नोवाक जोकोविक अच्छा कर रहे थे। अब आप देखिए इन दोनों ने 2016 के अंत के सत्र में क्या किया, यह दोनों इस साल अमेरिकी ओपन नहीं खेल पाए।”

भारत को टेनिस में ओलम्पिक पदक दिलाने वाले पेस ने कहा, “अब नडाल और फेडरर ने इस साल दो-दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीते।”

नडाल ने इस साल फ्रेंच ओपन और अमेरिकी ओपन का खिताब जीता तो वहीं फेडरर ने आस्ट्रेलियन ओपन और विंबलडन पर कब्जा जमाया।

44 साल के पेस के मुताबिक, “मेरा मानना है कि चैम्पियन की सबसे अच्छी पहचान यही होती है कि वह किस तरह से अपने आप में परिवर्तन लाता है और नया सीखता है ताकि लंबे समय तक अपने बेहतरीन खेल को जारी रख सके।”

पेस ने हालांकि भारत और कनाडा के बीच शुक्रवार को होने वाले डेविस कप मुकाबले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए खेलना हमेशा से ही गर्व की बात रही है और उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए हमेशा ही अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है।

यह दिग्गज खिलाड़ी इस समय भारत की डेविस कप टीम का हिस्सा नहीं है।

उन्होंने कहा, “देश के लिए खेलना मुझे हमेशा खुशी देता है। जब मैं डेविस कप, ओलम्पिक और एशियाई खेलों में खेला तो मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। यहां तक कि जब मैं विंबलडन जैसे टूर्नामेंट में खेला तब भी मैंने अपने देश के लिए खेला।”

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