(खुसर-फुसर)- मध्यप्रदेश शासन की एक मंत्री जो महाराज संबोधन पसंद करती हैं को एक पत्रकार ने रात १० बजे किसी खबर पर उनका मत जानने के लिये फोन किया,फोन तो उठाया गया लेकिन महाराज ने अपनी उसी अदा में पत्रकार की क्लास लेनी शुरू कर दी जैसी विधानसभा में मुकेश नायक की ली थी की हम वैसे इतनी रात में फोन उठाते तो नहीं हैं लेकिन आज उठा लिया क्योंकि हम दिल्ली में हैं और वे यही बात बार -बार कहती रहीं,सीधा संदेश था पत्रकार को की नालायक तेरी हिम्मत कैसे हुई फोन करने की,खैर हमारे मित्र भी बड़े राजसी हैं और सम्मान से सुनते रहे लेकिन जब लिमिट खत्म हो गयी तब मित्र महोदय आम-आदमी बन गये और वो खिंचाई महाराज की हुई की महाराज के होश ठिकाने आ गये और उन्हे याद आ गया की वे जनता की सेवा के लिये हैं.
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