नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बढ़ते रिश्तों के बीच विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ एक बैठक में गिनी के विदेश मंत्री ममडे टुरे ने भारत की पहल इंटरनेशनल सोलर एलायंस यानी आईएसए में शामिल होने के लिए अपना दस्तावेज सौंपा है।
विदेश मंत्रालय से जारी बयान के मुताबिक, सुषमा स्वराज और टुरे ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मैत्री व सहयोगपूर्ण संबंध को लेकर विस्तार से बातचीत की।
सुषमा ने कहा कि विदेश मंत्री टूरे ने गिनी के आर्थिक विकास में भारत की मदद की सराहना की। जिसपर स्वराज ने उन्हें भारत की तत्परता से अवगत कराया और भरोसा दिलाया कि भारत गिनी को साख व क्षमता निर्माण समेत विकासपरक सहयोग देता रहेगा।
उन्होंने टुरे से आग्रह किया कि गिनी आईएएफएस-3 यानी इंडिया अफ्रीका फोरम समिट-3 के दौरान घोषित एलओसी के जरिये वित्तपोषण के लिए नई परियोजनाओं का प्रस्ताव रख सकता है।
टुरे ने भारत सरकार व भारतीय व्यवसायियों को नवंबर के तीसरे हफ्ते पेरिस में होने वाले प्रदाता-निवेशक सम्मेलन में आने का न्योता दिया।
स्वराज ने गिनी की ओर से आईएसए समझौते पर गिनी संपुष्टि का स्वागत किया और उसे नई दिल्ली में इसके संस्थापकों के सम्मेलन में आने का निमंत्रण दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने 30 नवंबर 2015 को पेरिस में आयोजित जलवायु सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र के पक्षकारों के सम्मेलन में आईएसए का आगाज किया था। साथ ही, सौर ऊर्जा संसाधनों के मामले में उन्नत देशों के सहयोग से एक ऐसा मंच बनाने की बात की गई थी, जिससे उन देशों की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए साझा दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
कर्करेखा से मकर रेखा के बीच आने वाले सभी संभावित 121 सदस्य देशों के लिए यह गठबंधन खुला है।
भारत और गिनी के बीच वर्ष 2016-17 में 634.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार रहा है।
भारत गिनी को मुख्य रूप से चावल, दवाई व फार्मास्युटिकल्स, कपड़ा, परिवहन उपकरण, पेंट और रसायन के अलावा लौह-इस्पात व निर्माण उपकरण निर्यात करता है। वहीं भारत गिनी से मोती, पत्थर, जेवरात, खनिज ईंधन और राल का आयात करता है।
पिछले कुछ सालों में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, इनके पूर्ववती राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, और तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री के अफ्रीकी देशों के उच्च-स्तरीय दौरे होने से भारत का अफ्रीका के साथ संबंध प्रगाढ़ हुआ है।
अक्टूबर 2015 में नई दिल्ली में इंडिया अफ्रीका सम्मेलन करवाया गया था, जिसमें 54 अफ्रीकी देशों ने हिस्सा लिया था।
इस साल भी भारत ने अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक की सालाना बैठक आयोजित की थी।
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