नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) की दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देती याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में एआईएफएफ के अध्यक्ष पद पर एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के चुनाव को खारिज कर दिया था।
एआईएफएफ के अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी की मामले की जल्द सुनवाई की मांग पर न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई 10 नवम्बर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 31 अक्टूबर को एआईएफएफ के अध्यक्ष के तौर पर पटेल के चुनाव को मनमाना करार देते हुए खारिज कर दिया था। अदालत ने साथ ही पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाय. कुरैशी को एआईएफएफ का प्रशासक नियुक्त किया था।
न्यायालय ने कुरैशी को पांच माह के भीतर नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया था।
तिवारी ने अदालत को बताया कि अगर उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक नहीं लगाई जाती तो एआईएफएफ अंडर-20 फीफा टूर्नामेंट के आयोजन की दावेदारी की प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाएगा। याचिका में कहा गया है कि फीफा अंडर-20 विश्व कप के लिए दावेदारी की प्रक्रिया को पूरा करने की अंतिम तिथि 14 नवंबर 2017 है।
तिवारी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने एआईएफएफ के चुनावों को तब रद्द किया है जब देश को दो बड़े फुटबाल टूर्नामेंट इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) और आई-लीग नवंबर में शुरू हो रहे हैं।
उन्होंने साथ ही अदालत को बताया कि 11 अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल टूर्नामेंट इस साल और अगले दो साल में होने हैं और अगर अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक बोर्ड को चलाते हैं तो राष्ट्रीय टीम की भागीदारी को खतरा हो सकता है।
एआईएफएफ ने अपनी इस बात के समर्थन में पाकिस्तान फुटबाल महासंघ (पीएफएफ) का फीफा से निलंबन का हवाला दिया।
हाल ही में लाहौर उच्च न्यायालय ने पीएफएफ का कामकाज देखने के लिए प्रशासक नियुक्त किया था। इस फैसले के बाद फीफा ने अपने संविधान के अनुच्छेद 16 के पैरा एक और तीन तथा अनुच्छेद 13 को लागू करते हुए पीएफएफ को निलंबित कर दिया था।
उच्च न्यायालय ने एआईएफएफ और प्रफुल्ल पटेल के चुनावों को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि इसमें राष्ट्रीय खेल नियम का पालन नहीं किया गया है।
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