माले, 5 फरवरी (आईएएनएस)। मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह आत्म-निर्वासित राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद समेत अन्य राजनीतिक बंदियों व अधिकारियों के रिहा करने के निर्णय के संबंध में भारत सरकार से कोई सहायता नहीं मांगी। न्यायिक प्रशासन विभाग (डीजीए) ने यह जानकारी दी।
मालदीव की वेबसाइट सनऑनलाइन पर सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, “कुछ भारतीय अखबारों ने यह खबर छापी है कि मालदीव ने अपने एक फरवरी के निर्णय के लिए नई दिल्ली की मदद मांगी थी।”
डीजीए ने हालांकि इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और कहा, “न ही विभाग और न ही सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी कोई आग्रह किया था।”
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद पुलिस और विपक्षी प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार झड़प हुई। नाशीद समेत विपक्षी पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति का विरोध किया है और सभी बंदियों को तत्काल रिहा करने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन लोगों पर मामले ‘राजनीति से प्रेरित’ थे।
सरकार ने अभी तक इन बंदियों को यह कहकर रिहा नहीं किया है कि जिन पर ‘आतंकवाद, भ्रष्टाचार, गबन और देशद्रोह’ का आरोप हैं, उन्हें रिहा करना चिंता का विषय है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायधीश ने इन बंदियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
सरकार ने कहा कि महाभियोजक ने शीर्ष अदालत को इन बंदियों को रिहा करने से उत्पन्न कानूनी चुनौतियों के बारे में सूचित किया है। इसके जवाब में अदालत ने रविवार को दूसरा आदेश दिया जिसमें कहा गया है कि ‘न्यायालय के आदेश को लागू करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है’ और ‘आदेश का अवश्य ही पालन किया जाना चाहिए।’
मुश्किल में घिरे राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से अपना निर्णय वापल लेने के लिए कहा था।
इससे पहले, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यामीन को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की पहल का खुलासा किया था और सेना ने जोर देकर कहा था कि ‘इस तरह का आदेश नहीं दिया जा सकता।’
अटॉर्नी जनरल मोहम्मद अनिल ने कहा कि राष्ट्रपति को पद से हटाने का कदम ‘असंवैधानिक’ है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को केवल संसद में वोट के जरिए नहीं हटाया जा सकता और पुलिस व सुरक्षा बल ‘लोगों के नाजायज समूह’ द्वारा महाभियोग के आदेश को नहीं मानेंगे।
इस सत्र में संसद के पहले दिन की शुरुआत सोमवार से होने वाली थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया। राष्ट्रपति सोमवार को संसद को संबोधित करने वाले थे। संसदीय सचिव जनरल अहमद मोहम्मद ने बाद में बिना कोई कारण बताए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
नाशीद देश में लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पहले नेता थे। उन्होंने वर्ष 2008 में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और फरवरी 2012 में सेना ने उन्हें पद से हटा दिया था।
वर्ष 2015 में आतंकवाद के आरोप में उन्हें 13 वर्ष की सजा सुनाने के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नाशीद ने ट्वीट कर राष्ट्रपति यामीन से पद से इस्तीफा देने की मांग की थी। इसी तरह की मांग देश की विपक्षी पार्टियों ने भी अपने संयुक्त बयान में की है।
dharmpath.com dharmpath