बंगाल में 250 पीएसीएस बनेंगे बैकिंग केंद्र

कोलकाता, 12 फरवरी (आईएएनएस)। आगामी पंचायत चुनाव को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार 250 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) का प्रथम चरण में बैंकिंग केंद्र में उन्नयन करेगी, जिसका लक्ष्य अधिक किसानों को ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराना है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी के मुताबिक, वाणिज्यिक बैंकों द्वारा कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को दिए जाने वाले कर्ज की संख्या बेहद कम है, जिससे पूर्वी राज्यों का कर्ज-जमा अनुमान घट गया है।

वास्तव में, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा सोमवार को जारी ‘स्टेट फोकस पेपर फॉर 2018-19’ और ‘एरिया डेवलपमेंट स्कीम फॉर वेस्ट बंगाल 2018-2023’ रपट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में कृषि क्षेत्र में ऋण का प्रवाह वित्त वर्ष 2011-12 से 2016-17 तक अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाया है।

रपट में कहा गया है, “पश्चिम बंगाल में कर्ज-जमा अनुमान औसतन करीब 70 फीसदी है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। इसका मुख्य कारण कृषि और संबंधित क्षेत्रों को कर्ज देने की बैंकिंग क्षेत्र की अनिच्छा है, जोकि प्राथमिकता वाले ऋण क्षेत्रों में से एक है। पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में कर्ज-जमा अनुपात बेहद कम 40 फीसदी तक है।”

नाबार्ड द्वारा आयोजित ऋण सम्मेलन 2018-19 में राज्य के वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एच. के. द्विवेदी ने कहा, “हमने पहले चरण में 250 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को बैंकिंग केंद्र में बदलने का फैसला किया है, खासतौर से उन ग्राम पंचायतों में जहां किसी भी बैंक की शाखा नहीं है।”

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