चीनी ड्रैगन और भारतीय हाथी संदेह को विश्वास में बदलें : चीनी विदेश मंत्री

बीजिंग, 8 मार्च (आईएएनएस)। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को कहा कि चीन और भारत को ‘मानसिक अवरोध से मुक्त होकर’ साझा विश्वास विकसित करना चाहिए जो दोनों देशों के संबंधों के लिए ‘अमूल्य’ है।

चीनी संसदीय सत्र से इतर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वांग ने कहा कि दोनों देशों को पिछले वर्ष डोकलाम में सेनाओं के आमने-सामने आ जाने के बाद उत्पन्न युद्ध जैसी स्थिति से उपजे संदेह को विश्वास से बदल देना चाहिए।

आने वाले समय में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध सकारात्मक होने की और आशा जताते हुए उन्होंने कहा, “चीनी ड्रैगन और भारतीय हाथी को एक दूसरे के साथ झगड़ा नहीं, बल्कि नृत्य करना चाहिए।”

पिछले वर्ष सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में दोनों देशों के सेनाओं के आमने-सामने आ जाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। वहीं पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध का चीन द्वारा विरोध करने पर दोनों देशों के बीच संबंधों में कड़वाहट और बढ़ गई थी।

वांग ने कहा, “कुछ परीक्षाओं और मुश्किलों के बावजूद, चीन-भारत संबंध लगातार बढ़े हैं। इस प्रक्रिया में, चीन ने अपने वैधानिक अधिकारों और हितों को बरकरार रखा है और रिश्तों को बचाने पर ध्यान दिया है।”

विदेश मंत्री ने कहा, “चीनी और भारतीय नेताओं ने हमारे संबंधों के भविष्य के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित किया है। चीनी ड्रैगन और भारतीय हाथी को निश्चिय ही एक दूसरे के साथ झगड़ा नहीं करना चाहिए बल्कि एक दूसरे के साथ नृत्य करना चाहिए।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और चीन के बीच साझा विश्वास महत्वपूर्ण कड़ी है।

वांग ने कहा, “चीन और भारत को एक दूसरे को समर्थन देने के लिए सबकुछ करना चाहिए और साझा संदेह व संघर्ष को दरकिनार करना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “इसमें, चीन-भारत संबंधों के लिए साझा विश्वास सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। राजनीतिक विश्वास के साथ, हिमालय भी दोस्ताना आदान-प्रदान को नहीं रोक सकता। इसके बिना, समतल जमीन (लेवल लैंड) भी हमें एकसाथ नहीं कर सकता।”

वांग ने कहा, “मुझे इसे अपने भारतीय दोस्तों के सामने रखने दीजिए। हमारे साझा समझ ने हमारे मतभेदों को काफी पीछे छोड़ दिया है। चीन पारंपरिक दोस्ती को आगे बढ़ाने, दोस्ती करने और भारतीय लोगों का साथी बनने का इच्छुक है और इसके लिए तैयार है।”

विदेश मंत्री ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि दोनों पक्ष मानसिक अवरोध से मुक्त हो जाएंगे और एक-दूसरे के हाथ मिलाएंगे। चलिए संदेह को विश्वास के साथ बदलते हैं, मतभेदों को वार्ता से सुलझाते हैं और सहयोग के साथ भविष्य का निर्माण करते हैं।”

पिछले वर्ष डोकलाम संकट के बाद, दोनों देशों ने अपने संबंधों को सही करने के प्रयास किए हैं और ज्यादा वार्ता करने की इच्छा जताई है।

पिछले माह, भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने बीजिंग की यात्रा की थी और वांग व चीन के शीर्ष राजनयिक यांग जिची से मुलाकात की थी।

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