‘सीमा शुल्क से विलासिता बाजार का विकास बाधित

                                            images     रेमंड वील के अध्यक्ष ओलिवियर बर्नहेम

स्विट्जरलैंड की घड़ी निर्माता कंपनी रेमंड वील अगले दो साल में भारत में चार फ्रेंचाइजी शोरूम खोलना चाहती है, लेकिन वह चाहती है कि देश की सरकार सीमा शुल्क घटाए, जो अभी 49 फीसदी है।

रेमंड वील के अध्यक्ष ओलिवियर बर्नहेम ने कहा, “ऊंचे सीमा शुल्क के कारण भारतीय विलासिता वस्तु बाजार उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा है, जितनी तेजी से उसे बढ़ना चाहिए। इसके कारण घड़ी जैसी विलासिता वस्तु का व्यापार बाधित होता है। किसी दूसरे बाजार में ऐसी स्थिति नहीं है।”

बर्नहेम ने आईएएनएस से कहा, “हमारे राजदूत सरकार के साथ बात कर रहे हैं। निश्चित रूप से घड़ियों के आयात पर से बाधा हटाने की बात करने से पहले दूसरे मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण होंगे, लेकिन हमें उम्मीद है कि भविष्य अलग तरह का होगा।”

बर्नहेम कंपनी के संस्थापक रेमंड वील के दामाद हैं। रेमंड वील का निधन इसी साल जनवरी में हुआ है। 1976 में स्थापित यह ब्रांड अभी 87 देशों में कारोबार कर रहा है। भारत में इन घड़ियों की कीमत 45 हजार रुपये से आठ लाख रुपये के बीच है।

विस्तार योजना के बारे में बर्नहेम ने कहा, “यदि सरकार तेजी से काम करे तो हम 2016 तक चार स्टोर खोलना चाहते हैं। अन्यथा हम यह गति धीमी कर लेंगे। लेकिन हमें विश्वास है कि चीजें तेजी से आगे बढ़ेंगी।”

कंपनी ने अपने कदम देश में 1978 में रखे थे और आज इसके छह स्टोर नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में हैं।

कंपनी भारत में हर साल दो लाख घड़ियां बेचती हैं।

कंपनी के अध्यक्ष भारत और चीन के बाजार की तुलना करना मुनासिब नहीं समझते और कहते हैं कि दोनों बाजार अलग तरह से काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि कंपनी के कारोबार को स्मार्ट घड़ियों से कोई खतरा नहीं है।

उन्होंने कहा, “कई साल पहले प्लास्टिक घड़ियों से ऐसा ही खतरा बताया गया था। आखिर में इससे बाजार का ही विस्तार हुआ। मेरा मानना है कि स्मार्ट घड़ियों से घड़ियों के वैश्विक बाजार का विस्तार होगा। मेरे खयाल से यह प्रतिस्पर्धी नहीं बनेगा।”

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