संरक्षणवाद को जायज ठहराने से उपभोक्ताओं को नुकसान : अहलूवालिया

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का कहना है मौजूदा दौर में संरक्षणवाद को विकास और समावेश के नाम पर जायज ठहराया जा रहा है, जिसका आने वाले समय में नुकसान हो सकता है।

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का कहना है मौजूदा दौर में संरक्षणवाद को विकास और समावेश के नाम पर जायज ठहराया जा रहा है, जिसका आने वाले समय में नुकसान हो सकता है।

अहलूवालिया कट्स इंटरनेशनल की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। ‘प्रतिस्पर्धा व विकास : प्रतिस्पर्धा नीति किस प्रकार समावेशी विकास को बढ़ा दे सकती है’ विषय पर सोमवार को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के अध्यक्ष डी. के. सीकरी और संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (अंकटाड) में प्रतिस्पर्धा नीति व उपभोक्ता संरक्षण की प्रमुख टेरेसा मोरेरा और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ के प्रोफेसर एलीनोर फॉक्स भी मौजूद थे।

अहलूवालिया ने कहा, “संरक्षणवाद को विकास व समावेश के नाम पर जायज ठहराने से आने वाले समय में उपभोक्ताओं को नुकसान होगा।”

सीकरी ने कहा कि नियमों में निष्पक्षता बरतने और उन्हें समान रूप से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “जरूरत इस बात की है कि प्रतिस्पर्धा के माध्यम से विकास का फायदा ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिले।”

टेरेसा के अनुसार, प्रतिस्पर्धा नीति व कानून विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक हो सकते हैं।

इस मौके पर कट्स के महासचिव प्रदीप मेहता ने कहा कि टिकाऊं विकास का लक्ष्य हासिल करने में प्रतिस्पर्धा नीति की बड़ी भूमिका हो सकती है। कार्यक्रम में कट्स द्वारा प्रकाशित द्विवर्षीय रिपोर्ट ‘इंडिया कम्पटीशन एंड रेगुलेशन-2017 का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में दुनियाभर से 120 से अधिक प्रतिनिधि पहुंचे थे।

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