बीजिंग, 10 जुलाई (आईएएनएस)। चीन ने सामाजिक कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लियू शाओबो की विधवा लियू जिया को देश छोड़ने और जर्मनी जाने की इजाजत दे दी है। मीडिया की रिपोर्ट से मंगलवार को यह जानकारी मिली।
2010 में शाओबो के नोबेल पुरस्कार जीतने के बाद से ही लियू जिया घर में नजरबंद थीं।
परिवारिक मित्रों ने बीबीसी को बताया कि वह 11 बजे पूर्वाह्न् बर्लिन जाने के लिए विमान में सवार हुईं।
उन पर किसी भी अपराध के आरोप नहीं थे। उन्होंने मई में कहा था कि वह लगातार नजरबंदी के खिलाफ मौत को गले लगाने के लिए तैयार हैं।
विश्वविद्यालय के शिक्षक से मानवधिकार कार्यकर्ता बने लियू शाओबो को देश की सत्ता के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए 2009 में जेल में बंद कर दिया गया था। 2017 में लिवर कैंसर की वजह से उनका निधन हो गया और उनके अवशेषों को समुद्र में बहा दिया गया।
कहा जाता है कि लियू जिया कड़ी निगरानी के कराण डिप्रेशन में चली गईं।
चीन की सरकार ने यह कदम उनके पति की बरसी के ठीक तीन दिन पहले उठाया है।
चीनी अधिकारियों ने कहा था कि जिया एक स्वतंत्र नागरिक हैं। लेकिन, उनकी गतिविधि पर पाबंदी थी और उन्हें निगरानी में रखा जाता था।
एमनेस्टी इंटरनेशनल में चीनी रिसर्चर पेट्रिक पून ने कहा, “यह बेहतरीन समाचार है कि लियू जिया अब स्वतंत्र हैं और चीनी अधिकारियों के हाथों उनके उत्पीड़न और अवैध हिरासत की समाप्त हो गई है।”
उन्होंने कहा, “चीनी अधिकारियों ने उन्हें चुप कराने की कोशिश की लेकिन वह मानवधिकार के लिए खड़ी रहीं।”
एमनेस्टी ने चीन में जिया के परिवार के बचे सदस्यों के खिलाफ उत्पीड़न को भी बंद करने की मांग की है।
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