सीतामढ़ी की अनुपम बन गई ‘मशरूम गर्ल’ (फोटो सहित)

सीतामढ़ी (बिहार), 29 जुलाई (आईएएनएस)। आमतौर पर धारणा है कि किसानी का काम पुरुषों के जिम्मे है, लेकिन अगर आप जगत जननी सीता मां की जन्मस्थली सीतामढ़ी से गुजर रहे हों और कोई लड़की महिलाओं को इकट्ठा कर किसानी का गुर बताती नजर आए तो चौंकिएगा नहीं। सीतामढ़ी जिले के चोरौत प्रखंड के र्बी बेहटा गांव की रहने वाली अनुपम कुमारी ऐसी लड़की है, जो आज कृषि क्षेत्र में पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर काम कर रही है।

सीतामढ़ी (बिहार), 29 जुलाई (आईएएनएस)। आमतौर पर धारणा है कि किसानी का काम पुरुषों के जिम्मे है, लेकिन अगर आप जगत जननी सीता मां की जन्मस्थली सीतामढ़ी से गुजर रहे हों और कोई लड़की महिलाओं को इकट्ठा कर किसानी का गुर बताती नजर आए तो चौंकिएगा नहीं। सीतामढ़ी जिले के चोरौत प्रखंड के र्बी बेहटा गांव की रहने वाली अनुपम कुमारी ऐसी लड़की है, जो आज कृषि क्षेत्र में पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर काम कर रही है।

अनुपम के इस जुनून ने न केवल उनके वजूद को नाम दिया है, बल्कि कई महिलाओं ने भी उनकी प्रेरणा से चूड़ियों से भरे हाथों में कुदाल थाम लिया है। यही कारण है कि आज इस क्षेत्र में अनुपम की पहचान ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में की जाती है।

केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए सम्मानित अनुपम ने आईएएनएस को बताया कि जब सभी क्षेत्रों में महिलाएं और लड़कियां सफल हो रही हैं, तो कृषि क्षेत्र में लड़कियां क्यों नहीं सफल हो सकतीं।

स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने वाली अनुपम प्रारंभ से ही कुछ अलग करना चाहती थीं। इसी कारण उन्होंने कृषि क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने को अपना मुकाम बनाया।

किसान पिता उदय कुमार चौधरी की पुत्री होने के कारण जन्म से ही अनुपम ने खेती-बारी को नजदीक से देखा था। कुछ अलग करने की चाहत ने उसे कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचा दिया और वहां उसने मशरूम उत्पादन एवं केंचुआ खाद उत्पादन विषयक प्रशिक्षण प्राप्त की और उसके बाद तो मानो यह पूरे गांव की महिलाओं की प्रशिक्षक बन गईं। अनुपम ने गांव में ही नहीं, जिले के विभिन्न प्रखंडों के गांवों में महिलाओं को इकट्ठा कर उन्हें मशरूम उत्पादन के गुर सिखाने लगीं।

वह आईएएनएस से कहती हैं, “आज विभिन्न गांव की करीब 200 महिलाएं मिलकर मशरूम उत्पादन कर रही हैं।”

अनुपम को हालांकि इस बात का मलाल है कि वे लोग तापमान के कारण सिर्फ सितंबर, अक्टूबर और नवंबर तीन महीने ही मशरूम उत्पादन कर पा रही हैं। वह कहती हैं कि फिलहाल ओएस्टर मशरूम का ही उत्पादन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा वह गांव-गांव में केंचुआ खाद उत्पादन (वर्मी कंपोस्ट) की भी जानकारी कृषकों को दे रही हैं। अनुपम बताती हैं कि प्रारंभ में अन्य कार्यो की तरह उन्हें भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, बाद में महिलाओं का जुड़ाव उनसे होता गया और अब तो यह कारवां बन गया है।

अनुपम कहती हैं कि प्रारंभ से बलहा मधुसूदन कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों डॉ़ रामेश्वर प्रसाद और डॉ़ किंकर कुमार का सहयोग मिलता रहा है।

वैज्ञानिकों का भी मानना है, “कृषि के जिन क्षेत्रों में पुरुषों का कब्जा था, वहां आज अनुपम के कारण अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबी बनते देखा जा रहा है। आज अनुपम की पहचान ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में की जा रही है।”

बकौल अनुपम, “महिलाओं को आत्मनिर्भर बनते देखकर सुकून मिलता है। आज महिलाएं अपनी जरूरतें की चीजें खुद पूरी कर रही हैं और उनमें आत्मबल का संचार हुआ है।”

अनुपम को कृषि के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 22 फरवरी को पटना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूर्वी क्षेत्र की ओर से आयोजित 18वें स्थापना दिवस समारोह में प्रशस्ति पत्र देकर हौसला अफजाई की थी।

इससे पूर्व, गणतंत्र दिवस के अवसर पर डॉ़ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर में आयोजित कार्यक्रम में वहां के कुलपित डॉ.़ आऱ सी़ श्रीवास्तव द्वारा ‘अभिनव किसान’ से अनुपम को सम्मानित किया गया था।

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक साल जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर कृषि एवं संबद्ध कार्यो में बेहतर कार्य करने वाले चयनित एक किसान को अभिनव किसान पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इसके अलावे अनुपम को सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक और सीतामढ़ी जिला प्रभारी मंत्री सुरेश शर्मा भी कृषि में योगदान के लिए सम्मानित कर चुके हैं।

र्बी बेहटा गांव की महिलाएं भी आज अपनी बेटी अनुपम को ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में पहचान बनाए जाने से गर्व महसूस करती हैं। गांव की महिला यशोदा देवी कहती हैं कि सीतामढ़ी की पहचान मां सीता की जन्मस्थली के रूप में है, आज इसी सीता की धरती पर अनुपम भी महिलाओं के कल्याण में जुटी हैं।

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