नई दिल्ली, 15 नवंबर – भापाल गैस त्रासदी की पीड़िता कमला बाई को आखिरकार 30 सालों की लंबी लड़ाई के बाद ‘अच्छे दिनों’ की आहट के संकेत मिले हैं। सरकार ने उन्हें मुआवजे की राशि बढ़ाने और पीड़ितों की संख्या दोबारा तय करने का भरोसा दिया है। 70 वर्षीय कमला बाई के साथ राष्ट्रीय राजधानी में भोपाल गैस कांड के कई पीड़ित पिछले 10 नवंबर से न्याय की मांग की लिए अनिश्चतकालीन अनशन कर रहे थे।
पांच जीवित बची महिलाओं और उनके समर्थकों ने जंतर-मंतर पर पिछले चार दिनों से जारी निर्जला व्रत को रसायन और उर्वरक मंत्री अनंत कुमार से आश्वासन मिलने के बाद तोड़ा।
कमला बाई ने आईएएनएस को बताया, “सरकार के आश्वासन से उम्मीद की एक किरण मिली है कि सरकार हमारी आवाज सुन रही है। अब मुझे भी अच्छे दिनों की आश है। नए सरकार के वादे से यह आश जगी है।”
हादसे में बचे लोगों की मांग है कि जो लोग इस त्रासदी से प्रभावित हुए थे उन्हें एक लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए साथ ही सरकार इस हादसे में मृतकों और घायलों की संख्या को केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में संशोधित करे।
यूनियन कार्बाइड त्रासदी 2-3 दिसंबर 1984 की मध्य रात्रि में हुई थी।
भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा, “मंत्री हमारी दोनों मांगों, गलत चिकित्सकीय आंकड़ों के बजाय चिकित्सकीय अनुसंधान एवं अस्पताल के आंकड़ों के आधार पर पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए राजी हो गए हैं, जिसकी मांग को लेकर हम आंदोलन कर रहे थे।”
चिल्ड्रन अगेंस्ट डॉ कार्बाइड की सफीन खान ने आईएएनएस को बताया, “बेसक हमें 30 साल लग गए पर आखिरकार झपकियां ले रही सरकार को झटका दे ही दिया।”
बीते चार दिनों से अनशन पर बैठी पांच महिलाओं ने शुक्रवार को मंत्री से आश्वासन मिलने के बाद अनशन तोड़ा।
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि मंत्री वैज्ञानिक अनुसंधान एवं अस्पताल के आंकड़ों के आधार पर पुनरीक्षण याचिका में मृतकों की संख्या और घायलों की संख्या में संशोधन के लिए राजी हो गए हैं।
उन्होंने कहा, “मंत्री इस बात पर भी राजी हो गए हैं कि सरकार पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई तत्काल कराने का प्रयास करेगी।”
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