नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश के प्रमुख कपास उत्पादक बाजारों में इस सप्ताह रूई की आवक पिछले सप्ताह के मुकाबले दोगुनी हो गई और आगे दिवाली के पहले आवक का जोर बना रह सकता है। मगर, आवक का जोर रहने के बावजूद कीमतों में नरमी के आसार कम हैं क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार से रूई में मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा, घरेलू बाजार में खरीदारी बढ़ने की पूरी संभावना है।
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश के प्रमुख कपास उत्पादक बाजारों में इस सप्ताह रूई की आवक पिछले सप्ताह के मुकाबले दोगुनी हो गई और आगे दिवाली के पहले आवक का जोर बना रह सकता है। मगर, आवक का जोर रहने के बावजूद कीमतों में नरमी के आसार कम हैं क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार से रूई में मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा, घरेलू बाजार में खरीदारी बढ़ने की पूरी संभावना है।
इस कारोबारी सप्ताह के आखिर में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू वायदा बाजार में रूई के वायदा सौदों में आई तेजी के कारण रूई का भाव पिछले सप्ताह के मुकाबले बढ़त के साथ बंद हुआ।
हाजिर भाव में हालांकि थोड़ी सुस्ती रही, जोकि आवक में जोरदार वृद्धि और सप्ताह के मध्य में शेयर बाजार की मंदी के कारण दुनियाभर के बाजारों में रूई के भाव में आई गिरावट से प्रेरित थी। मगर, सप्ताह के आखिर में रिकवरी आई।
घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कॉटन (रूई) का अक्टूबर डिलीवरी वायदा शुक्रवार को मजबूती के साथ 23,110 रुपये प्रति गांठ (170 किलो) पर बंद हुआ जोकि पिछले सप्ताह के मुकाबले 330 रुपये और पिछले महीने के मुकाबले 1,460 रुपये प्रति गांठ ज्यादा है।
अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर शुक्रवार को दिसंबर डिलीवरी कॉटन वायदा 78.53 सेंट प्रति पौंड बंद हुआ, जबकि पिछले सप्ताह यह अनुबंध आईसीई पर 77.92 सेंट प्रति पौंड और 28 सितंबर को 76.37 सेंट प्रति पौंड पर बंद हुआ था।
बाजार के जानकार बताते हैं कि अंतर्राष्ट्री बाजार में रूई के दाम में तेजी अमेरिका में माइकल तूफान से फसल को हुए नुकसान की रिपोर्ट के कारण देखने को मिल रही है।
उधर, आवक का दबाव दोगुना बढ़ने से घरेलू हाजिर बाजार में रूई के भाव में थोड़ी नरमी रही। बेंचमार्क कॉटन गुजरात शंकर-6 (29 एमएम) का भाव शनिवार को 46,700-47,000 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) था, जोकि पिछले सप्ताह के मुकाबले 100-200 रुपये प्रति कैंडी कम है।
रूई बाजार के जानकार मुंबई के गिरीश काबरा ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर के आखिर में रूई की आवक करीब 1.5 लाख गांठ थी, वहां इस साल सिर्फ 1.20 लाख गांठ है, वो भी इस सप्ताह बढ़ी है। पिछले सप्ताह तक महज 60,000 गांठ ही आवक थी।
हालांकि उन्होंने दिवाली से पहले आवक बढ़ने की संभावना जताई है। काबरा ने कहा, “दिवाली पर किसानों को पैसे की जरूरत होती है, इसलिए त्योहार से पहले आवक बढ़ेगी। मगर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जो संकेत मिल रहे हैं उससे कीमतों में नरमी की संभावना कम है। वहीं, घरेलू मिलों की खरीदारी भी जोर पकड़ेगी क्योंकि अब तक तो आवक हुई है उसमें 80 फीसदी माल के सौदे निर्यात के लिए हो चुके हैं और मिलों को रूई कम मिलने से उनके पास स्टॉक का टोटा है।”
बाजार सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश, चीन, वियतनाम, तुर्की, पाकिस्तान से रूई की मांग आ रही है। बाजार विश्लेषक ने बताया कि अमेरिका-चीन व्यापारिक टकराव के कारण चीन द्वारा अमेरिका से रूई की खरीद सुस्त पड़ गई है, जिसका फायदा भारत को मिलेगा। हालांकि कुछ लोग यह भी बता रहे हैं कि चीन, ब्राजील और आस्ट्रेलिया से ज्यादा रूई खरीदेगा।
काबरा ने कहा कि अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आने से अमेरिकी रूई का आयात सस्ता होगा जिससे रूई की कीमतों में तेजी आ सकती है। उन्होंने कहा कि रूई एक अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी है और इसका भाव हमेशा अमेरिकी बाजार में तेजी या मंदी के रुखों से चालित होता है। इसलिए, अगले सप्ताह वायदा और हाजिर दोनों भावों में मजबूती रह सकती है।
उन्होंने कहा कि इस साल उत्पादन भी पिछले साल के मुकाबले कम है, उससे कीमतों को सपोर्ट मिलेगा। कॉटन एसोएिशन ऑफ इंडिया ने इस साल कॉटन का उत्पादन 348 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया है, जबकि पिछले साल उत्पादन 365 लाख गांठ का अनुमान लगाया गया था।
बाजार सूत्रों ने बताया कि दो-तीन नवंबर के बाद दिवाली की तैयारी शुरू होने के बाद आवक सुस्त पड़ जाएगी, लेकिन दिवाली के बाद फिर आवक में इजाफा होगा। नवंबर के आखिर और दिसंबर के दौरान पीक सीजन में भारत में रूई की रोजाना आवक 2.50 गांठ के आसपास रहती है।
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