मुंबई, 5 नवंबर (आईएएनएस)। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने चालू सीजन 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) में कॉटन उत्पादन के अपने अनुमान में कटौती की है। सीएआई की ओर से सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार इस साल देश में 343.25 लाख गांठ (170 किलो) कॉटन (रूई) का उत्पादन होने का अनुमान है। एसोसिएशन ने सीजन के आरंभ में पिछले महीने की रिपोर्ट में 348 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान लगाया था।
सीएआई ने देश के सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्य गुजरात में इस साल कॉटन उत्पादन में दो लाख गांठ, महाराष्ट्र में एक लाख गांठ, कर्नाटक में एक लाख गांठ और ओडिशा में 75,000 गांठ की कटौती की है।
सीएआई के प्रेसिडेंट अतुल गंतरा ने एक बयान में कहा कि प्रतिकूल मौसमी दशाओं के कारण इन राज्यों में उत्पादन घटने की संभावना है।
एसोसिएशन के अनुसार, अक्टूबर में कॉटन की कुल आपूर्ति करीब 50.13 लाख गांठ रही, जिसमें 26.13 लाख गांठ की आवक और एक लाख गांठ आयात और 23 लाख गांठ पिछले साल का बकाया स्टॉक शामिल है।
एसोसिएशन की समिति के अनुमान के अनुसार, अक्टूबर में कॉटन की खपत 27 लाख गांठ रही और निर्यात तकरीबन 2.50 लाख गांठ हुआ। इस प्रकार पिछले महीने की समाप्ति पर कुल बकाया स्टॉक 20.63 लाख गांठ रहने का अनुमान है जिसमें 16.53 लाख गांठ कपड़ा मिलों के पास और 4.10 लाख गांठ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास है। बाकी स्टॉक कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया व अन्य के गोदामों में है।
सीएआई के तुलन पत्र के अनुसार, 2018-19 में देश में कॉटन की आपूर्ति 390.25 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया गया है जिसमें ओपनिंग स्टॉक 23 लाख गांठ और आयात 24 लाख गांठ शामिल है। वहीं, एसोसिएशन ने घरेलू खपत 324 लाख गांठ और निर्यात 51 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया है। इस प्रकार 2018-19 के कॉटन सीजन के अंत में 30 सितंबर 2019 को कॉटन का कैरीओवर स्टॉक 15.25 लाख गांठ रह जाएगा।
सीएआई ने कहा कि पिछले 60-70 दिनों के दौरान कॉटन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश नहीं होने के कारण अक्टूबर में कॉटन की रिकॉर्ड आवक हुई है।
पिछले साल उत्तर भारत में जहां किसानों को कपास का मूल्य अक्टूबर के दौरान 4,500 रुपये प्रति क्विंटल मिला था, वहां इस साल उन्हें औसत भाव 5,300 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। यही कारण है कि आवक में जोरदार इजाफा हुआ है।
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