कोलकाता, 27 नवंबर (आईएएनएस)। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली हेप्टाथलीट स्वप्ना बर्मन के कोच सुभाष सरकार पश्चिम बंगाल सरकार की खेल नीति को लेकर खासे नाराज हैं।
सुभाष का कहना है कि राज्य सरकार के पास स्पष्ट खेल नीति न होने के कारण राज्य से चैम्पियन खिलाड़ी नहीं निकल पा रहे हैं।
दर्द और दरिद्रता के बीच इस वर्ष अगस्त में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली स्वप्ना को ममता बनर्जी की सरकार ने अब तक केवल 10 लाख रुपये दिए हैं। वहीं ओडिशा की दुतीचंद को तीन करोड़ रुपये और असम की हिमा दास को 1.6 करोड़ रूपये की ईनामी राशि मिल चुकी हैं।
बंधन बैंक ने यहां एक सम्मान समारोह में स्वप्ना को 10 लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया।
सुभाष ने सम्मान समारोह से इतर कहा, “मैं राजनीतिक मामलों में नहीं पड़ना चाहता। लेकिन हर किसी को पता है कि स्वप्ना को अब तक कितनी पुरस्कार राशि मिली है।”
स्वप्ना के कोच ने हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने पांच स्वर्ण, पांच रजत और आठ कांस्य पदक सहित 18 पदक जीते हैं।
स्वप्ना सरस्वती साहा के बाद स्वर्ण जीतने बंगाल की दूसरी खिलाड़ी हैं। उनसे पहले साहा ने 2002 के एशियाई खेलों में पदक जीता था।
सुभाष ने कहा, “पश्चिम बंगाल में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन हमारी सरकार को एक खेल नीति लानी चाहिए जो अगली पीढ़ी के लिए एक उदाहरण बने। मैं अगली पीढ़ी के लिए यह कहना चाहता हूं कि आपको भूख लगी है, इसके लिए आपको वित्तीय मदद की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में भी स्वप्ना जैसे कई प्रतिभाशाली बच्चे हैं लेकिन वे उचित मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण रास्ते में खो रहे हैं।”
सुभाष ने कहा, “लेकिन यदि कोई वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है तो बंगाल के कमजोर परिवारों में से कई परिवार खेलों को अपना जीवन देने के लिए तैयार होंगे। आप देख सकते हैं कि हरियाणा कैसे अपने सरकार के पूर्ण सहयोग के चलते खिलाड़ी तैयार कर रहा है।”
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