इगतपुरी, 4 दिसम्बर (आईएएनएस)। महिंद्रा समूह ने वर्ष 2040 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के अपने संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है और कंपनी का इगतपुरी विनिर्माण संयंत्र हाल ही में शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला पहला संयंत्र बन गया है। परीक्षण, जांच और प्रमाणीकरण (टीआईसी) की अग्रणी कंपनी ब्यूरो वेरिटास (इंडिया) प्रा. लि. द्वारा इसे प्रमाणित किया गया है।
कंपनी की तरफ से जारी एक बयान में महिंद्रा व्हीकल मैन्युफैक्च र्स लि. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और महिंद्रा एंड महिंद्रा लि. के प्रमुख (विनिर्माण परिचालन) विजय कालरा ने कहा है, “यह महिंद्रा समूह के भीतर पहला ऐसा संयंत्र है, जिसे शून्य कार्बन उत्सर्जन वाले संयंत्र के रूप में प्रमाणित किया गया है। हम ऊर्जा के संतुलित उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर तीव्र ध्यान और अपशिष्ट कार्बन के अवशोषण हेतु वृक्षारोपण के जरिए इसे हासिल करने में सक्षम रहे हैं।”
बयान में कहा गया है कि महिंद्रा एंड महिंद्रा दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है, जिसने वर्ष 2030 तक अपनी ऊर्जा उत्पादकता को दोगुना करने हेतु प्रतिबद्धता जाहिर की है और क्लाइमेट ग्रुप के ईपी100 प्रोग्राम के लिए हस्ताक्षर किया है। ऊर्जा की कम खपत के जरिए लाइटिंग, ऊर्जा की कम खपत के जरिए हीटिंग, वेंटिलेशन एवं एयर कंडिशनिंग (एचवीएसी), मोटर एवं हीट रिकवरी प्रोजेक्ट्स का उपयोग कर कंपनी ने निर्धारित समय सीमा से लगभग 12 वर्ष पहले ही अपने ऑटोमोटिव बिजनेस की ऊर्जा उत्पादकता को दोगुना कर लिया है।
महिंद्रा समूह के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, अनिर्वाण घोष ने कहा, “कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में अपने द्वारा किए जा रहे प्रयास के जरिए, हम न केवल जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने की दिशा में पहल कर रहे हैं, बल्कि नवाचार और व्यवसाय में टिकाऊपन पर अधिक जोर दे रहे हैं।”
कंपनी ने कहा कि महिंद्रा ऐसी पहली भारतीय कंपनी है जिसने प्रति टन उत्सर्जित कार्बन के लिए 10 डॉलर के अपने आंतरिक कार्बन मूल्य की घोषणा की, ताकि शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने हेतु किए जा रहे प्रयासों के लिए आवश्यक निवेशों की फंडिंग की जा सके। कंपनी को कार्बन सिंक्स तैयार करने में 10 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है, जिसकी मदद से इसने इस लक्ष्य को हासिल किया है।
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