संजय दत्त जेल लौटे, अतिरिक्त छुट्टी का आवेदन रद्द

indexमुंबई, 10 जनवरी (आईएएनएस)| महाराष्ट्र सरकार द्वारा अभिनेता संजय दत्त की अतिरिक्त 14 दिनों की फर्लो (छुट्टी) का आवेदन खारिज किए जाने के बाद वह शनिवार शाम पुणे स्थित यरवदा केंद्रीय कारागार लौट गए। एक अधिकारी ने कहा कि संजय दत्त शाम पांच बजे के करीब जेल लौटे। उनकी 14 दिन की फर्लो 24 दिसंबर से शुरू हुई थी।

इससे पहले संजय के वकील हितेश जैन ने आईएएनएस को बताया, “उनका आवेदन रद्द कर दिया गया है। वह शनिवार को ही जेल लौट जाएंगे।”

उनके जेल के लिए रवाना होने से पहले बांद्रा स्थित उनके घर में पत्नी मान्यता और परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें उदास मन से विदा किया।

जेल के लिए रवाना होने से पहले संजय दत्त ने पत्रकारों से हर बार उनकी छुट्टी पर होने वाले विवादों पर नाखुशी जाहिर की।

अभिनेता ने कहा, “छुट्टी लेने का हक हर कैदी का है, इसलिए मैं भी लेता हूं। प्रशासन ने कुछ भी गलत नहीं किया। वे मुझे कानूनी रूपरेखा के तहत ही छुट्टी देते हैं।”

सरकार और जेल प्रशासन द्वारा अन्य कैदियों की अपेक्षा संजय दत्त के साथ नरमी बरते जाने के आरोपों पर उन्होंने मीडिया की आलोचना की।

जेल रवाना होने के लिए अपनी गाड़ी में बैठते समय उन्होंने कहा, “मैं भी एक आम आदमी हूं। मैं मीडिया का सम्मान करता हूं और आपको भी मेरा सम्मान करना चाहिए।”

संजय की 14 दिनों की छुट्टी की अवधि गुरुवार को ही समाप्त हो गई थी, लेकिन 27 दिसंबर को अवकाश विस्तार के लिए दिए गए आवेदन का फैसला लंबित होने के कारण वह पुणे स्थित यरवदा जेल वापस नहीं लौटे थे।

छुट्टी की अवधि गुरुवार को समाप्त होने के बाद 55 वर्षीय संजय विमान से पुणे पहुंचे और यरवदा जेल के आसपास कुछ घंटे रहने के बाद मुंबई स्थित अपने घर लौट गए थे।

कहा जा रहा है कि यह घटना उस असमंजस की स्थिति का नजीता थी, जो कुछ अधिकारियों के बयान से उत्पन्न हुई। बयान में कहा गया था कि संजय का जेल लौटना आवश्यक नहीं है, जब तक कि 27 दिसंबर को छुट्टी विस्तार के लिए दिए गए उनके आवेदन पर फैसला नहीं आ जाता।

उल्लेखनीय है कि अभिनेता संजय दत्त को 2007 में घातक हथियार (एके-56 रायफल) रखने का दोषी पाया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 में संजय पर साबित हुए दोष को बरकरार रखते हुए सजा की अवधि घटाकर पांच साल कर दी थी, जिनमें से कुछ वक्त वह पहले ही जेल में बिता चुके हैं।

संजय ने 16 मई, 2013 को आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उन्हें 42 महीने की शेष सजा के लिए पुणे की उच्च सुरक्षा वाली यरवदा जेल भेज दिया गया था।

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