इंडोनेशिया में चुनाव ने ले ली 300 लोगों की जान

48517910_303इंडोनेशिया में चुनावों के बाद खबर आ रही है कि थकावट के चलते वहां 300 से भी अधिक जानें चली गई हैं. किसी भी देश के लिए यह चुनावों से जुड़ा एक अजीब सा मामला है.

भारत में एक महीने तक चलने वाले चुनावों को देख कर लगता है कि दुनिया में इतना पेचीदा चुनाव और कहीं नहीं हो सकता. लेकिन हाल ही में इंडोनेशिया में हुए चुनावों पर नजर डालेंगे, तो सिर चकरा जाएगा. सोचिए कैसा हो अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ ही संपन्न हो जाएं. इंडोनेशिया ने कुछ ऐसा ही किया. एक ही दिन में इस देश ने एक साथ चार अलग अलग तरह के चुनाव करा डाले. लोगों को अपने लिए केंद्र सरकार भी चुननी थी, राज्य सरकार को भी, नगर पालिका को भी और अपने राष्ट्रपति को भी. यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे पेचीदा चुनाव कहा जा रहा है.

इंडोनेशिया के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक सभी चुनाव एक साथ करा दिए गए. अब नतीजा 300 मौतों के रूप में नजर आ रहा है. दरअसल इंडोनेशिया दुनिया में सबसे ज्यादा द्वीपों वाला देश है. यहां 17 हजार से भी ज्यादा छोटे बड़े द्वीप हैं और सब जगह एक साथ चुनाव कराना काफी बड़ी चुनौती है. कई द्वीपों पर लगातार भूकंप और सूनामी का खतरा भी रहता है. इन द्वीपों तक मतदान पेटियां ले जाना एक जोखिम भरा और बेहद मुश्किल काम है.

17 अप्रैल को इंडोनेशिया में चुनाव हुए थे. चुनाव के लगभग दो हफ्ते बाद यह बात सामने आई है कि इंडोनेशिया में अब तक 287 मतदान अधिकारियों और 18 पुलिस कर्मियों की जान जा चुकी है. चुनाव आयोग के प्रवक्ता आरीफ प्रियो सुसांतो ने बताया कि मारे गए लोगों के अलावा 2,095 लोगों के बीमार होने की भी खबर है, “मौतों का मुख्य कारण थकावट और कुछ मामलों में थकावट के कारण हुए हादसे और बीमारियां हैं.” चुनाव आयोग का कहना है कि 2014 में हुए चुनावों के दौरान 150 लोगों की जान गई थी. उस दौरान दो चुनावों में तीन महीने का अंतर था.

इस बार के चुनावों में कुल 19.3 करोड़ मतदाता थे और इनमें से 81 फीसदी लोगों ने वोट डाला. इन्हें आयोजित कराने के लिए देश भर में करीब 70 लाख लोगों को काम पर लगाया गया था और आठ लाख से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए थे. चुनाव आयोग के अनुसार चुनावों का एक साथ आयोजन करने का मकसद खर्चा और वक्त दोनों को बचाना था. लेकिन आयोग को अंदाजा नहीं था कि इतने बुरे परिणाम देखने को मिलेंगे. आरीफ प्रियो सुसांतो ने कहा कि वित्त मंत्रालय मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा देने और बीमार लोगों को चिकित्सीय सहायता पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है.

भारत से इतर इंडोनेशिया में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि कर्मचारियों को हाथ से ही सभी पर्चियां गिननी पड़ती हैं. ऐसे में चार अलग अलग चुनावों के चलते लोगों को चार पर्चे भरने पड़े और इन सब की गिनती में एक महीने से भी ज्यादा का वक्त लगेगा. भारत में 23 मई को तो इंडोनेशिया में 22 मई को नतीजों की घोषणा होनी है.

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