वित्त मंत्रालय ने शुरू की नए सिरे से बैंकों के समेकन की कवायद

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान बैंकों के समेकन की योजना के मद्देनजर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से संभावित विलय व अधिग्रहण की जानकारी मांगनी शुरू कर दी है।

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान बैंकों के समेकन की योजना के मद्देनजर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से संभावित विलय व अधिग्रहण की जानकारी मांगनी शुरू कर दी है।

वित्त मंत्रालय ने पीएसबी से यह बताने को कहा कि कैसे इस पहल से बैंकों के संचालन को मजबूती मिलेगी।

सरकार के सूत्रों ने बताया कि सभी पीएसबी के प्रमुखों से समेकन योजना के लिए तैयार रहने को कहा गया है, ताकि नई सरकार बनने पर वैकल्पिक व्यवस्था (एएम) के सामने इसे रखा जा सके।

वैकल्पिक व्यवस्था (एएम) वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक समूह है, जिसका सृजन समेकन कार्य को त्वरित पूरा करने और बैंकों को मजबूत व प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 2017 में किया गया था।

सूत्र ने बताया, “बैंकों के समेकन का अगला चरण वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही में शुरू हो सकता है। विलय आरंभ करने से पहले पीएसबी को अपने तुलन पत्रों को सुधारने के लिए काफी वक्त दिया गया, क्योंकि इससे ही यह सुनिश्चित होगा कि परिणामी इकाई मजबूत व विश्वसनीय है।”

पिछले साल एएम ने विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ विलय को मंजूरी प्रदान की थी, जो एक अप्रैल, 2019 से लागू है। भारतीय स्टेट बैंक में 2017 में इसके सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय किया गया था।

इस साल समेकन की प्रक्रिया के दायरे में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से लेकर कुछ छोटे पीएसयू बैंक आ सकते हैं। विलय के लिए सिंडिकेट बैंक, ओरिएंयटल बैंक ऑफ कॉमर्स, आंध्रा बैंक और इलाहाबाद बैंक के नामों पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि इस पर अंतिम निर्णय तभी लिया जाएगा, जब अधिग्रहणकर्ता बैंक और लक्षित बैंक दोनों इस संबंध में अपना प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास रखेंगे।

सूत्रों ने बताया कि इस कदम से पीएनबी को मजबूती मिलेगी, जोकि हीरा कारोबारी नीरव मोदी द्वारा बैंक को चपत लगाने की घटना के बाद बुरे दौर में रहा है, हालांकि बैंक ने मुनाफा दर्ज किया है।

चर्चा यह भी है कि यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया को भी इस पर अपनी राय देने को कहा जा सकता है।

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