आरएसएस को ‘आतंकी’ संगठन बताने वाले शख़्स की अग्रिम ज़मानत याचिका मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने ख़ारिज की

आरोप है कि इस शख़्स ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक की तुलना ‘तालिबानी आतंकी संगठन’ से की थी. आरोपी के वकील ने कहा कि उन्होंने कभी किसी धर्म या संगठन पर टिप्पणी नहीं की. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि उनके ख़िलाफ़ ‘पर्याप्त सबूत’ मौजूद हैं.

नई दिल्ली- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को एक एक ‘आतंकवादी’ संगठन बताने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है.

लाइव लॉ के अनुसार, अतुल पास्टर नाम के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी जिसमें आरएसएस की तुलना एक ‘तालिबान आतंकवादी संगठन’ से की गई थी.

रिपोर्ट के अनुसार, अतुल का पोस्ट वायरल हो गया था जिसके बाद उन पर आईपीसी की धारा 153 (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 295 (उपासना स्थल को हानि पहुंचाना या अपमान करने के इरादे से अपवित्र करना), 505 (1) (सार्वजनिक शरारत के लिए प्रेरित करने वाले बयान), और 505 (2) (वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करने या बढ़ावा देने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया.

उनकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए राज्य ने तर्क दिया है कि अतुल ने ‘परेशानी खड़ी की और जनता की धार्मिक भावनाओं को भड़काया.’ वहीं, अतुल के वकील ने कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और उन्होंने कभी किसी धर्म या संगठन पर टिप्पणी नहीं की.

हालांकि अदालत ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ ‘पर्याप्त सबूत’ मौजूद हैं.

उल्लेखनीय है कि देश की सर्वोच्च अदालत और विभिन्न हाईकोर्ट समय-समय पर अदालतों से आग्रह करते रहे हैं कि वे डिफ़ॉल्ट जमानत लेने के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दें, जो कैद के बजाय त्वरित जमानत की वकालत करता है.

लाइव लॉ ने बताया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा एक ऐसे व्यक्ति को जमानत दी गई है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट करने के लिए मामला दर्ज किया गया था.

जस्टिस मोहम्मद फैज आलम खान की खंडपीठ ने कहा, ‘यह सभी को पता होना चाहिए कि इस देश के प्रधानमंत्री या किसी संवैधानिक पद संभालने वाले व्यक्ति को किसी विशेष वर्ग या धर्म तक सीमित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे देश के प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व करते हैं.’

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