भारत की ‘अल्पसंख्यक विरोधी छवि’ घरेलू कंपनियों को नुकसान पहुंचाएगी: रघुराम राजन

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बृहस्पतिवार को आगाह किया कि भारत की अल्पसंख्यक विरोधी छवि से भारतीय उत्पादों के लिए (अन्य देशों में) बाजार का नुकसान हो सकता है.

उन्होंने साथ ही कहा कि इसके चलते विदेशी सरकारें भारत को एक गैर-भरोसेमंद साझेदार मान सकती हैं. उन्होंने भारत में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की चिंताओं के बीच यह बात कही.

उन्होंने कहा कि भारत की साख लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के लिए रही है, लेकिन अब उसे छवि की लड़ाई लड़नी पड़ रही है.

राजन ने टाइम्स नेटवर्क इंडिया इकनॉमिक कॉन्क्लेव में कहा, ‘अगर हमारी छवि एक ऐसे लोकतांत्रिक देश की बनती है, जो अपने सभी नागरिकों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करता है, तो गरीब देश के रूप में हमें अधिक सहानुभूति मिलती है. उपभोक्ता कहते हैं कि मैं ऐसे देश से सामान खरीद रहा हूं, जो सही काम करने की कोशिश कर रहा है. इस तरह हमारा बाजार बढ़ता है.’

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गर्मजोशी भी इस तरह की धारणाओं से तय होती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा कि यह केवल उपभोक्ता नहीं हैं, जो इस तरह के विकल्प चुनते हैं कि किसको संरक्षण देना है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गर्मजोशी भी इस तरह की धारणाओं से तय होती है, क्योंकि सरकारें, अल्पसंख्यकों के प्रति कोई देश कैसा बर्ताव रखता है, इस आधार पर निर्णय लेती हैं कि वह देश विश्वसनीय भागीदार है या नहीं.

राजन ने कहा कि चीन उइगरों (मुस्लिम अल्पसंख्यक) के साथ और कुछ हद तक तिब्बतियों के साथ भी इस तरह की छवि समस्याओं से पीड़ित रहा है, जबकि यूक्रेन को भारी समर्थन मिला है, क्योंकि यहां के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, जो लोकतांत्रिक विचारों की रक्षा के लिए खड़ा होता है. विश्व विश्वास करता है.

सेवा क्षेत्र का निर्यात भारतीयों के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है और देश को इसे बनाए रखना होगा, राजन ने कहा, ‘हमें गोपनीयता पर पश्चिम की संवेदनशीलता के बारे में बहुत जागरूक होने की जरूरत है.’

जिन अवसरों का लाभ उठाया जा सकता है, उनमें से एक चिकित्सा क्षेत्र में है, राजन ने चेतावनी देते हुए कहा कि एक ऐसे देश के रूप में देखे जाने से, जो डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की चिंताओं को संतुष्ट नहीं करता है, सफल होना मुश्किल हो सकता है.

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय या केंद्रीय जांच ब्यूरो (एसबीआई) जैसे संवैधानिक प्राधिकरणों को कम आंकने से हमारे देश के लोकतांत्रिक चरित्र का क्षरण होता है.

घरेलू मामलों पर अन्य टिप्पणियों में राजन ने कहा कि भारतीय प्रशासन को तीन कृषि कानूनों जैसे उदाहरणों से बचने के लिए प्रमुख हितधारकों के साथ परिवर्तनों पर चर्चा करके शासन की चुनौतियों से जूझना होगा. किसानों के विरोध के बाद पिछले साल तीन कृषि कानूनों को रद्द कर दिया गया था.

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