योगी सरकार यूपी में बदलेगी सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम

लखनऊ-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 को बदलकर नया, युगानुकूल, और पारदर्शी कानून लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया है. यह नया कानून प्रदेश में पंजीकृत लगभग आठ लाख से अधिक संस्थाओं के संचालन, पंजीकरण, नवीनीकरण, और संपत्ति प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, और प्रभावी बनाएगा.

सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (Societies Registration Act, 1860) भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान 21 मई, 1860 को लागू किया गया एक केंद्रीय कानून है. जिसमें राज्य अपनी आवश्यकताओं के अनुसार संशोधन कर सकते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य उन संस्थाओं (सोसाइटियों) को कानूनी मान्यता प्रदान करना है जो सामाजिक, शैक्षणिक, वैज्ञानिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, या कल्याणकारी उद्देश्यों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कला, खेल आदि के लिए कार्य करती हैं. यह अधिनियम गैर-लाभकारी संगठनों को पंजीकृत करने और उनके संचालन को नियंत्रित करने का ढांचा प्रदान करता है.

इस अधिनियम के तहत सोसाइटी को रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज के पास पंजीकरण कराना होता है, जिसमें कम से कम सात सदस्यों की आवश्यकता होती है. पंजीकरण के लिए मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MoA) और नियम-उपनियम (By-laws) जमा करने होते हैं. यह अधिनियम सुनिश्चित करता है कि सोसाइटी अपने पंजीकृत उद्देश्यों के लिए कार्य करे और उसकी संपत्ति का उपयोग केवल सामाजिक कल्याण के लिए हो. प्रत्येक पांच वर्ष बाद पंजीकृत सोसाइटी का नवीनीकरण आवश्यक है.

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