ईरान-मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पूरी दुनिया की नजरें अब कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हैं. पिछले दस दिनों से जारी इस संघर्ष ने न केवल राजनीतिक अस्थिरता पैदा की है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी खलबली मचा दी है.
युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं. ऐसा साल 2022 के बाद पहली बार हुआ है. इस तेजी की मुख्य वजह होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता है.
दुनिया का लगभग 20% तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है. युद्ध के कारण ईरान ने यह रास्ता बंद कर दिया है, जिस वजह से वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है. जिससे कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है.
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए यहां की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ता है. राहत की बात यह है कि अभी तक भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर हैं. हालांकि, पिछले सप्ताह एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी जरूर देखी गई है.
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